Charter data leak: साइबर हमलों के लिए विश्वभर में कुख्यात ShinyHunters समूह ने एक बार फिर बड़े स्तर डेटा चोरी करने का दावा किया है। जिसके बाद से सुरक्षा से जुड़े कंपनियों के बीच में हड़कंप मच गया है। इस समूहों के निशान पर इसबार अमेरिका के टेलीकॉम Charter Communications का रहा है। कथित चोरी ग्रुप ने डार्क वेब पर अपनी लीक साइट के माध्यम से सार्वजनिक भी कर दिया है।
ShinyHunters ग्रुप ने वॉइस फ़िशिंग से डेटा चोरी कर डार्क वेब पर किया प्रकाशित, कंपनी ने जांच की शुरू। जानें क्या पूरा मामला।
रैनसम मांग और डेटा लीक की रणनीति
बता दें कि यह समूह काफी लंबे समय से वॉइस फिशिंग कर तकनीक का उपयोग कर कंपनियों के नेटवर्क में घुसपैठ करता है। सिस्टम में पहुंचता है। डेटा चुराकर कंपनियों को धमकी देता है। इसके बदले में फिरौती भी मांगता है। कहता है अगर हमारी मांगे नहीं मानी गई तो उसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। चार्टर के मामले में भी संकेत मिलते हैं कि कथित तौर पर कंपनी ने किसी तरह की फिरौती का भुगतान नहीं किया, जिसके बाद डेटा ऑनलाइन डाल दिया गया।
4.2 करोड़ रिकॉर्ड का दावा, असली आंकड़ा कम
हैकर्स ने दावा किया है कि उनके पास लगभग 42 मिलियन ग्राहक रिकॉर्ड हैं। इनमें कई संवेदनशील जानकारियां भी शामिल है। वास्तविक में करीब 4.9 मिलियन यूनिक ईमेल आईडी प्रभावित हुई हैं, जो कुल दावे से काफी कम है।
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किस तरह की जानकारी हुई प्रभावित
ये अपराधी डेटा में नाम, ईमेल, फोन नंबर और पते जैसी व्यक्तिगत जानकारी शामिल है। इसके अलावा लगभग 85,000 ऐसे रिकॉर्ड भी पाए गए हैं। इनमे जॉब टाइटल जैसी प्रोफेशनल जानकारी शामिल है। पिछले एक साल में शाइनीहंटर्स ने कई बार बड़े से बड़े संगठनों को निशाना बनाने का दावा किया। Canvas और Grafana जैसी कंपनियाँ भी शामिल बताई जाती हैं।
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Charter की स्थिति और कंपनी का बयान
चार्टर कम्युनिकेशंस अमेरिका की सबसे बड़ी ब्रॉडबैंड कंपनियों में से एक है। जिसके 3 करोड़ से अधिक ग्राहक हैं। वहीं, कंपनी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि के साथ मिलकर काम कर रही है। वो कह रहे हैं कि यह केवल सेल्स टूल्स से प्रभावित हुए हैं। जबकि CPNI लीक नहीं हुई है। इसने यह साफ है कि हैकिंग ग्रुप्स द्वारा किए गए दावे कितने वास्तविक और कितने बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते हैं।
