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Stock Market Today: बढ़त के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

Stock Market Today: बढ़त के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

Stock Market Today: आज सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, रुपये की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख शेयरों की अपडेट जानें। Stock Market Today: शुक्रवार सुबह BSE सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों हल्की बढ़त के साथ खुले। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने बाजार को शुरुआती सहारा दिया। हालांकि, IT शेयरों में मुनाफावसूली के कारण बढ़त सीमित रही।  Stock Market Today: सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत कैसी रही?  सुबह 9:25 बजे BSE सेंसेक्स 30 50.07 अंक या 0.064% की बढ़त के साथ 77,978.22 पर कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी 50 30.30 अंक या 0.12% चढ़कर 24,347.45 पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई की शुरुआत से आईटी शेयरों में आई मजबूत तेजी के बाद आज निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार की रफ्तार थोड़ी धीमी रही।  रुपये की मजबूती और सस्ते कच्चे तेल से मिला सहारा  आज शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया 13 पैसे मजबूत होकर 95.37 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। गुरुवार को भी रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.50 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.2% गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.8% टूटकर 82.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।  इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी और गिरावट  बढ़त वाले शेयर: बजाज फाइनेंस (+3.94%), बजाज फिनसर्व (+3.02%), महिंद्रा एंड महिंद्रा (+2.02%), मारुति (+0.80%), बीईएल (+0.78%)  गिरावट वाले शेयर: Infosys (-3.91%), TCS (-3.75%), HCL टेक (-3.49%), टेक महिंद्रा (-2.55%), इटरनल (-0.35%)  एशियाई बाजारों में भी ज्यादातर प्रमुख सूचकांक बढ़त में कारोबार करते दिखे, जिससे भारतीय बाजार को शुरुआती समर्थन मिला। शुरुआती संकेत बताते हैं कि बाजार अभी सतर्क रुख में है। दिनभर निवेशकों की नजर आईटी शेयरों, वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की चाल पर बनी रहेगी। 
𝗚𝗼𝗹𝗱 𝗥𝗮𝘁𝗲 𝟯𝟬 𝗝𝘂𝗹𝘆: 𝟭𝟴𝗞, 𝟮𝟮𝗞 और 𝟮𝟰𝗞 के नए दाम

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Gold Rate Today: 30 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता और पुणे में 18K, 22K और 24K सोने के ताजा भाव जानिए। Gold Rate Today: क्या आप आज सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं? तो पहले Gold Rate Today जरूर देख लें। 30 जुलाई को देश के प्रमुख शहरों में 18 कैरेट, 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के दाम अलग-अलग दर्ज किए गए हैं। अभी सबसे अधिक कीमत चेन्नई में देखने को मिल रही है, जबकि दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे में रेट लगभग समान हैं।  Gold Rate Today: प्रमुख शहरों में आज के लेटेस्ट सोने के भाव देश के अलग-अलग शहरों में टैक्स, स्थानीय शुल्क और ज्वेलर्स के मार्जिन की वजह से कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है। आज जारी ताजा रेट इस प्रकार हैं  बेंगलुरु: 18K – 1,06,545.00 | 22K – 1,30,126.96
Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

Apple Lease EMI मिस हुई तो iPhone लॉक होगा? जानें सच

क्या EMI नहीं भरने पर iPhone के ऐप्स बंद हो जाएंगे? Apple ने Restricted Mode की खबरों को खारिज किया  Apple Upgrade: क्या iPhone की EMI नहीं भरने पर आपका फोन लॉक हो जाएगा? इस सवाल पर Apple ने अब बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने साफ कहा है कि Apple Upgrade Program के तहत भुगतान चूकने पर डिवाइस के फीचर्स को सीमित करने वाला कोई Restricted Mode नहीं होगा।   Apple के इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि EMI नहीं भरने पर iPhone, iPad, Mac या Apple Watch का इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है। कंपनी के मुताबिक, ऐसे मामलों को मौजूदा फाइनेंसिंग और लीज खत्म करने की नीतियों के तहत संभाला जाएगा।  Apple Upgrade Program में Restricted Mode की चर्चा क्यों हुई?  हाल ही में iOS 27 बीटा में एक फीचर को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी। इसमें App Managed Feature देखा गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह फीचर फाइनेंसिंग पार्टनर्स को डिवाइस की स्थिति की समय-समय पर जांच करने की सुविधा दे सकता है। इसके बाद ऐसी अटकलें तेज हो गईं कि Apple भुगतान नहीं करने वाले ग्राहकों के डिवाइस पर Restricted Mode लागू कर सकता है। इस मोड में कथित तौर पर सिर्फ Phone, Settings, Clock, Wallet और App
July 29, 2026
भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, तेल खरीदना पड़ेगा भारी

अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों का बिल आगे बढ़ा, जानें भारत क्यों निशाने पर है और 100% संभावित टैरिफ का क्या असर पड़ सकता है।  India-US Tariff: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल सीनेट में आगे बढ़ गया है। मंगलवार को हुए प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया। इसमें रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है।  US Russia Sanctions Bill में भारत क्यों आया निशाने पर?  इस प्रस्ताव का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है। बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देगा, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ताजा समझौते के मुताबिक, संभावित टैरिफ का दायरा रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों तक सीमित किया गया है। भारत और चीन इस सूची में महत्वपूर्ण देश माने जा रहे हैं।  भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर अमेरिकी कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नया दबाव बन सकता है।  READ MORE: हैदराबाद के टॉप 10 AI स्टार्टअप्स 2026   भारत पहले से झेल रहा 50% टैरिफ का दबाव  भारत पहले ही अमेरिकी टैरिफ को लेकर दबाव में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50% तक पहुंच गया था। अब नया प्रतिबंध विधेयक सामने आने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित कानून में राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध या टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।  रूस से तेल खरीद पर क्या होगा असर?  भारत के लिए रूसी तेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए एक अहम विकल्प रहा है। अगर अमेरिका इस बिल को कानून का रूप देता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है और कई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस की ऊर्जा आय घटेगी और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव पड़ेगा।  READ MORE: सेंसेक्स
July 29, 2026
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