SafePal Phishing Scam: SafePal Data Breach में करीब 39,798 ग्राहकों की जानकारी सामने आई है। ये सभी ग्राहक 2025 से 11 अप्रैल के बीच SafePal से ऑर्डर करने वाले थे। कंपनी के मुताबिक, लीक में ग्राहकों के नाम, घर के पते और संपर्क जानकारी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि क्रिप्टो फंड, पासवर्ड, प्राइवेट की, सीड फ्रेज, बैंक डिटेल और कार्ड नंबर सुरक्षित रहे।
SafePal Data Breach: करीब 39,798 ग्राहकों का नाम, पता और संपर्क जानकारी लीक, जानें क्रिप्टो फंड और दूसरी जरूरी जानकारी कितनी सुरक्षित रही।
SafePal Data Breach में क्या-क्या लीक हुआ?
SafePal ने बताया कि यह मामला उसके वॉलेट सिस्टम की हैकिंग से जुड़ा नहीं है। कंपनी के अनुसार, ग्राहकों की डिजिटल संपत्ति पर कोई असर नहीं पड़ा। लीक में मुख्य रूप से ऑर्डर से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इसमें ग्राहक का नाम, फिजिकल एड्रेस और कॉन्टैक्ट डिटेल सामने आई। कंपनी ने साफ किया कि पासवर्ड, प्राइवेट की, सीड फ्रेज, बैंक डिटेल, पेमेंट कार्ड नंबर और सरकारी पहचान पत्र हमलावरों के हाथ नहीं लगे। यानी यूजर्स के क्रिप्टो फंड सीधे तौर पर सुरक्षित रहे। फिर भी डेटा लीक को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
थर्ड-पार्टी प्लगइन बना डेटा लीक की वजह
SafePal के मुताबिक, इस घटना की वजह ऑर्डर ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले एक थर्ड-पार्टी प्लगइन में मौजूद ऑथराइजेशन खामी थी। हमलावर सिर्फ ऑर्डर नंबर में बदलाव करके दूसरे ग्राहकों की ऑर्डर जानकारी देख सकते थे। इस तरह की कमजोरी को आमतौर पर Insecure Direct Object Reference (IDOR) कहा जाता है। SafePal ने दावा किया कि खामी सामने आने के बाद इसे तुरंत ठीक कर दिया गया। कंपनी ने प्रभावित ग्राहकों को security@safepal.com से ईमेल भी भेजा है। इसके अलावा कंपनी ने एक स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिटर को जांच के लिए लगाया। डेटा रखने की अवधि घटाकर 90 दिन कर दी गई है।
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क्रिप्टो यूजर्स के लिए क्यों बढ़ा खतरा?
इस मामले में क्रिप्टो फंड सुरक्षित रहे, लेकिन नाम और घर का पता लीक होना अलग तरह का खतरा पैदा करता है। करीब 40 हजार क्रिप्टो यूजर्स की जानकारी साइबर अपराधियों के लिए टारगेटेड फिशिंग और फर्जी पहचान बनाने में मदद कर सकती है। हमलावर ऑर्डर की जानकारी का इस्तेमाल करके ज्यादा भरोसेमंद फर्जी ईमेल या मैसेज भेज सकते हैं। उदाहरण के लिए, कोई हमलावर SafePal या किसी क्रिप्टो कंपनी के नाम से संपर्क कर सकता है। उसे पता हो सकता है कि यूजर ने क्या खरीदा था और सामान कहां भेजा गया था। इससे फर्जी लिंक पर क्लिक कराने की कोशिश ज्यादा असरदार हो सकती है।
घर का पता लीक होना भी बड़ी चिंता
क्रिप्टो यूजर्स के मामले में फिजिकल एड्रेस लीक होने का खतरा सामान्य डेटा लीक से ज्यादा गंभीर हो सकता है। क्रिप्टो दुनिया में ‘Wrench Attack’ शब्द का इस्तेमाल ऐसी घटनाओं के लिए किया जाता है, जहां किसी व्यक्ति को धमकाकर या दबाव डालकर उसकी क्रिप्टो की हासिल करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, SafePal ने कहा है कि वॉलेट और डिजिटल एसेट प्रभावित नहीं हुए, लेकिन लीक हुई पहचान संबंधी जानकारी को बदला नहीं जा सकता। पासवर्ड बदला जा सकता है। घर का पता नहीं। SafePal ने 30 से ज्यादा फर्जी वेबसाइट और फिशिंग लिंक की पहचान कर उन्हें हटाने की कार्रवाई भी की है। कंपनी ने ग्राहकों के लिए यह जांचने का टूल भी दिया है कि उनका डेटा इस घटना में शामिल था या नहीं।
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SafePal Data Breach में क्रिप्टो फंड सुरक्षित रहे, लेकिन करीब 39,798 ग्राहकों की निजी जानकारी लीक हुई। यह मामला याद दिलाता है कि क्रिप्टो सुरक्षा सिर्फ वॉलेट और प्राइवेट की तक सीमित नहीं है। निजी जानकारी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
