Canvas Cyber Attack: विश्व के सबसे चर्चित एजुकेशन टूल Canvas पर हाल ही में हुए साइबर हमले ने नई बहस को जन्म दे दिया है। इस घटना के बाद से शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। यह मामला तब और सुर्खियों में आया है जब कंपनी इस्ट्रक्चर ने खुद स्वीकार किया है कि उसने हैकर्स के साथ समझौता किया है। जिसके बाद से अचानक मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
कैनवस एजुकेशनल प्लेटफॉर्म पर हुए साइबर हमले के बाद छात्रों और स्कूलों के डेटा की सुरक्षा को लेकर उठने लगे गंभीर सवाल…जानिए क्यों?
चोरी हुए छात्र और स्कूल डेटा को लेकर बनी चिंता
साइबर हमले के दौरान कथित तौर पर छात्रों, स्कूलों और संस्थानों से जुड़ा संवेदनशील डेटा चुराया गया था। औमतौर ऐसा इसिलए किया जाता है ताकि फिरौती के तौर पर मोटी रकम वसूला जा सके। हालांकि, समझौते के बाद पूरा डेटा वापस कर दिया गया। साथी उस डेटा को नष्ट करने की भी जानकारी मिल गई है। बता दें कि इसकी जिम्मेदारी चर्चित हैकिंग ग्रुप ShinyHunters ने ली थी। इस ग्रुप के सदस्यों का कहना है कि डेटी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब आगे से फिरौती नहीं मांगी जाएगी।
कंपनी ने ग्राहकों को दी राहत की जानकारी
वहीं, इंस्ट्रक्चर ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस समझौते का फायदा सभी प्रभावित ग्राहकों को मिलेगा। किसी भी स्कूल, कॉलेज या अन्य ग्राहक को अलग से हैकर्स के संपर्क में आने की जरूरत नहीं है। कंपनी का कहना है कि अब किसी ग्राहक को सार्वजनिक रूप से ब्लैकमेल करने की आशंका नहीं है।
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अमेरिकी संसद की समिति ने मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी हाउस होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी ने भी कंपनी से जवाब तलब किया है। इंस्ट्रक्चर के CEO स्टीव डेली या किसी वरिष्ठ अधिकारी को ब्रीफिंग देने के लिए कहा है। इससे कमेटी जनाना चाहती है कि कितनी मात्रा में डेटा प्रभावित हुई और कंपनी ने इतनी बड़ी घटना पर क्या कदम उठाए। खासकर CISA के साथ कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
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शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते साइबर खतरों का संकेत
पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है। महामारी के बाद स्कूलों और विश्वविद्यालयों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है। जिसके कारण साइबर अपराधियों की नजर अब शिक्षा क्षेत्र पर भी टिक गई है। ऐसे साइबर हमलों में छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी, ईमेल, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य शैक्षणिक डेटा के लीक होने का खतरा रहता है। यही वजह है कि अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
साइबर सुरक्षा को लगातार मजबूत करना भी जरूरी है। शिक्षा संस्थानों को मल्टी-लेयर सिक्योरिटी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
