भारत के टेक हब्स में AI से बढ़ेगी नई खोजों की रफ्तार

भारत के टेक हब्स में AI से बढ़ेगी नई खोजों की रफ्तार

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May 28, 2026

AI Patents India: भारत अब सिर्फ कम लागत वाले बैक-ऑफिस काम का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से ग्लोबल इनोवेशन हब बनता जा रहा है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का मानना है कि Artificial Intelligence (AI) की मदद से भारत के टेक सेंटर यानी Global Capability Centres (GCCs) में नए प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और Intellectual Property (IP) बनाने की रफ्तार और तेज होगी।

हाल ही में हुई एक चर्चा के दौरान कई बड़ी कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि AI अब कर्मचारियों को रोजमर्रा के साधारण कामों से आगे बढ़ाकर ज्यादा जटिल और इनोवेटिव काम करने में मदद कर रहा है।

AI की मदद से भारत के टेक हब तेजी से इनोवेशन सेंटर बन रहे हैं। जानें कैसे GCCs में नए प्रोडक्ट, पेटेंट और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की रफ्तार बढ़ रही है।

AI बदल रहा काम करने का तरीका

Daimler Truck, Kimberly-Clark और Publicis Groupe की यूनिट Epsilon के अधिकारियों का कहना है कि AI की वजह से कर्मचारियों का फोकस अब साधारण प्रोसेस वाले कामों से हटकर नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर बढ़ रहा है।

Daimler Truck Innovation Center India के प्रमुख राधाकृष्णन कोडक्कल ने कहा कि भारत के GCCs में पहले से ही पेटेंट, ट्रेड सीक्रेट और नई टेक्नोलॉजी विकसित करने का काम बढ़ रहा है और AI इस प्रक्रिया को और तेज कर सकता है।

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भारत के GCC ने उम्मीद से पहले हासिल किया बड़ा लक्ष्य

भारत के टेक हब अब दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के GCC ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 98.4 अरब डॉलर का राजस्व हासिल किया। खास बात यह है कि इंडस्ट्री ने यह लक्ष्य तय समय से करीब चार साल पहले ही हासिल कर लिया।

इसके अलावा, भारत में पेटेंट फाइलिंग भी तेजी से बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में पेटेंट आवेदन 11.3% बढ़कर 90,000 से ज्यादा हो गए। इनमें लगभग आधे आवेदन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरफ से किए गए।

भारत में पेटेंट फाइलिंग क्यों है चुनौती?

कई कंपनियों का कहना है कि भारत में पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया अभी भी आसान नहीं है। Kimberly-Clark के अधिकारी दीना दयालन ने बताया कि उनकी कंपनी भारत में पेटेंट फाइल नहीं करती, बल्कि अमेरिका के जरिए यह प्रक्रिया पूरी करती है, क्योंकि यहां कई तरह की दिक्कतें आती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेटेंट एग्जामिनर्स की संख्या कम होने से आवेदन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके अलावा कानूनी खर्च और कुछ प्रक्रियात्मक अस्पष्टताएं भी कंपनियों के लिए चुनौती बनती हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया है, वीडियो सुनवाई की सुविधा बढ़ाई है और आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की है।

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भविष्य में और बढ़ सकता है भारत का रोल

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के GCC की मजबूत नींव आने वाले समय में और ज्यादा हाई-वैल्यू इनोवेशन और IP वर्क को बढ़ावा दे सकती है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से भारत का रोल ग्लोबल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेक्टर में और मजबूत होने की उम्मीद है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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