Google Earth AI से अब लोकेशन की AI तस्वीरें बनाना आसान होगा, यह फीचर पढ़ाई, प्रॉपर्टी प्लानिंग और भविष्य की जगहों का डिजाइन देखने में मदद कर सकता है।
Nano Banana 2: Google Earth ने अब वेब यूजर्स के लिए AI से तस्वीर बनाने वाला नया फीचर शुरू किया है। यह सुविधा 30 जुलाई से दुनियाभर में उपलब्ध है। इसमें Google Earth की सैटेलाइट, हवाई और 3D तस्वीरों के साथ Nano Banana 2 AI मॉडल का इस्तेमाल होता है।
Google Earth AI फीचर कैसे काम करेगा?
यूजर Google Earth पर किसी जगह को खोलकर जूम कर सकता है। इसके बाद ‘Create Image’ विकल्प चुनकर टेक्स्ट में बता सकता है कि वह उस जगह को किस तरह देखना चाहता है। AI उसी वास्तविक जगह को आधार बनाकर नई तस्वीर तैयार करता है। मसलन, यूजर किसी खाली प्लॉट पर आधुनिक घर, सामुदायिक बगीचा या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जोड़कर देख सकता है। इससे प्रस्तावित बदलाव को वास्तविक आसपास के माहौल में समझना आसान हो सकता है।
पढ़ाई में भी काम आएगा नया AI फीचर
Google के मुताबिक, शिक्षक इस फीचर का इस्तेमाल इतिहास और भूगोल पढ़ाने में कर सकते हैं। उदाहरण के लिए Pompeii के खंडहर चुनकर AI से पूछा जा सकता है कि ज्वालामुखी विस्फोट से पहले यह जगह कैसी दिखती होगी। AI मौजूदा लोकेशन को आधार बनाकर सड़कें, इमारतें और लोगों जैसे दृश्य जोड़ सकता है। हालांकि ऐसी तस्वीरें AI की कल्पना होती हैं। इन्हें सटीक ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं माना जाना चाहिए।
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आर्किटेक्ट और प्रॉपर्टी प्लानिंग में मदद
यह टूल आर्किटेक्ट, प्रॉपर्टी प्लानर और आम यूजर्स के लिए भी उपयोगी हो सकता है। किसी खाली जमीन पर प्रस्तावित प्रोजेक्ट का शुरुआती रूप दिखाया जा सकता है। इससे क्लाइंट को तकनीकी नक्शे के बजाय सीधा दृश्य समझाना आसान होगा। यूजर किसी पार्क, ऑफिस या पूरे मोहल्ले का भविष्य का रूप भी तैयार कर सकता है। Google Earth में चुनी गई असली लोकेशन के साथ AI बनाई तस्वीर बदलाव को ज्यादा वास्तविक तरीके से दिखाती है।
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Nano Banana 2 करेगा तस्वीर तैयार
Google के मुताबिक, Gemini जरूरी जानकारी हासिल करता है और फिर Nano Banana 2 उस आधार पर दृश्य तैयार करता है। Nano Banana 2 को फरवरी 2026 में पेश किया गया था। यह तेज तस्वीर बनाने, संपादन और निर्देशों को बेहतर तरीके से समझने पर केंद्रित है। अभी यह सुविधा Google Earth के वेब संस्करण पर दुनियाभर में उपलब्ध है। AI तस्वीरों की मदद से पढ़ाई, योजना और विजुअल प्रेजेंटेशन आसान हो सकते हैं, लेकिन इनके नतीजों को वास्तविक तथ्य समझने से पहले सावधानी जरूरी होगी।
