Iran daily loss hormuz blockade: मिडिल ईस्ट में तनाव एकबार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बयान के बाद ईरान और यूनाईटेड स्टेट के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक Strait of Hormuz नाकाबंदी के कारण ईरान को रोजाना 435 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है। यह नाकाबंदी सोमवार से शुरू हुई है। इससे तेल, उर्वरक, भोजन और अन्य सामानों के प्रवाह को और बाधित कर सकती है, जिससे और अधिक महंगाई बढ़ सकती है।
US नाकेबंदी से ईरान की तेल सप्लाई पर असर, क्या वैश्विक बाजार में आएगा बड़ा झटका? जानें चौंका देनेवाली जानकारी यहां।
आर्थिक नुकसान का बड़ा अनुमान
जानकारों की माने तो अगर नाकेबंदी जारी रही तो ईरान को हर दिन भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर देश की मंहगाई पर पड़ेगा। बता दें कि ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल के निर्यात से आता है। नाकेबंदी से कच्चे तेल और पैट्रोकेमिकल्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। निर्यात रूकने पर विदेशी मुद्रा भी घट सकती है। लेकिन अब US नाकाबंदी
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वैकल्पिक रास्तों की तालाश
फिलहाल, ईरान इससे पूरी तरह असहाय नहीं है। वह Jask जैसे विकल्पों के माध्यम से तेल निर्यात जारी रखने का कोशिश कर सकता है। रिपोर्ट की माने तो मार्च के अंत तक, ईरान के पास नाकाबंदी से प्रभावित खाड़ी क्षेत्र के बाहर लगभग 154 मिलियन बैरल तेल समुद्र में तैर रहा था। इस मामले के जानकार किन मालेकी के अनुमान इस बात पर आधारित हैं कि ईरान रोज़ाना 1.5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात कर रहा है, जिसकी कीमत युद्धकालीन दर पर लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल है, और यह भी माना गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक तेल फ़ारसी खाड़ी के अंदर स्थित खर्ग द्वीप से होकर गुज़रता है। कहा जा रहा है कि ईरान केवल उन्हीं जहाजों को गुज़रने की अनुमति दी थी जिन्हें वह संबंध अच्छे हैं। जबकि उनसे भारी शुल्क वसूल करता था।
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शिपिंग ट्रैफिक बहुत बड़ी बाधा
होर्मुज से दुनियां का लगभग 20 फीसदी तेल गुजरता है। इतनी बड़ी संख्या में जहाजों पर नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं है। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो यह नाकाबंदी लगभग वही काम करती है जो खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए किया गया कोई सैन्य अभियान करता। उन्होंने राय दी कि यह नाकाबंदी ईरानी अर्थव्यवस्था को उतना ही नुकसान पहुँचाएगी, जितना कि अमेरिकी ज़मीनी सेना तैनात करने से होता। लेकिन इसमें वे जोखिम शामिल नहीं होंगे जो सेना तैनात करने में होते हैं। इतना ही नहीं अमेरिका इस नाकेबंदी में चीन को लपेटना चाहता है। चीन इस चीन इस जलडमरूमध्य से अपने कच्चे तेल का 45 से 50 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का 30 प्रतिशत आयात करता है। यही वजह है कि कहीं चीन भी दबाव में साथ दे दे।
