US-Iran War Semiconductors: पश्चिम एशिया की जंग का असर अब सीधे आपके स्मार्टफोन, लैपटॉप और AI तक पहुंच गया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर के सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने वाली कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
ईरान-इजरायल जंग का असर अब चिप इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। Samsung और SK Hynix के 200 अरब डॉलर डूब गए। कतर से आने वाले हीलियम की सप्लाई खतरे में है जो चिप बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
Samsung और SK Hynix को कितना नुकसान?
कोरिया की दो सबसे बड़ी चिप कंपनियां Samsung और SK Hynix इस जंग की सबसे बड़ी शिकार बनी हैं। जंग शुरू होने के बाद से इन दोनों कंपनियों का मिलाकर 200 अरब डॉलर से ज्यादा का बाजार मूल्य स्वाहा हो गया। इसके अलावा VanEck Semiconductor ETF भी करीब 3 फीसदी गिर गया है।
READ MORE: ईरान संघर्ष बढ़ा सकता है चिप्स की कीमत और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता
मध्य पूर्व का चिप इंडस्ट्री से क्या कनेक्शन?
अब आप सोच रहे होंगे कि मध्य पूर्व की जंग से चिप बनाने का क्या लेना-देना? बात दरअसल दो खास चीजों की है, हीलियम और ब्रोमीन। हीलियम वो गैस है जो चिप बनाने में बहुत जरूरी होती है। यह चिप बनाने वाली मशीनों को ठंडा रखती है और लिथोग्राफी प्रक्रिया में काम आती है।
सबसे बड़ी बात यह है कि हीलियम का कोई विकल्प नहीं है और दुनिया का एक तिहाई से ज्यादा हीलियम कतर से आता है। पिछले हफ्ते ईरान के ड्रोन हमले ने कतर की QatarEnergy कंपनी के Ras Laffan इंडस्ट्रियल सिटी को बंद करा दिया।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब कम से कम 2-3 महीने हीलियम उत्पादन बंद रहेगा और सप्लाई चेन को सामान्य होने में 4-6 महीने लग सकते हैं। ब्रोमीन भी चिप बनाने में काम आता है और दुनिया का दो तिहाई ब्रोमीन इजरायल और जॉर्डन से आता है। जंग के कारण इसकी सप्लाई पर भी खतरा मंडरा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया का 25 फीसदी से ज्यादा हीलियम बाजार से गायब हो जाएगा।
READ MORE: अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान, सेमीकंडक्टर से बदल जाएगा भारत का फ्यूचर
AI डेटा सेंटर पर क्या असर?
Microsoft और Amazon जैसी बड़ी कंपनियां AI के लिए जो डेटा सेंटर बना रही हैं वो सामान्य डेटा सेंटर से 3 से 5 गुना ज्यादा बिजली खाते हैं। जंग की वजह से तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया जिससे बिजली और महंगी हो गई। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत बहुत बढ़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर के खर्च का आधा हिस्सा बिजली पर जाता है। अगर बिजली महंगी हुई और चिप सप्लाई बाधित हुई तो कंपनियां चिप खरीदना कम कर देंगी।
