Huskeys ने 8 मिलियन डॉलर की फंडिंग के साथ साइबर सुरक्षा बाजार में एंट्री की।

साइबर सुरक्षा में बड़ा धमाका! Huskeys ने 8 मिलियन डॉलर के साथ एंट्री

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March 30, 2026

Huskeys Funding:  Cyber Security के क्षेत्र एक नया Startup बहुत ही तेजी से चर्चा में आ गया है। Huskeys ने स्टेल्थ मोड से बाहर आते हुए 8 मिलियन डॉलर की फंडिंग हांसिल की है। कंपनी ने एक एज सिक्योरिटी मैनेजमेंट  प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया है। इसे खास तौर पर मॉडर्न वेब सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए तैयार किया है। यह मुश्किल से मुश्किल समस्याओं से निपटता है जिनसे पारंपरिक WAF नहीं निपट पाते। यह एज सिक्योरिटी स्टैक के ऊपर एक एजेंटिक लेयर जोड़ता है। मल्टी-क्लाउड और मल्टी-WAF वातावरणों कंट्रोल करता है। यह विभिन्न नेटवर्क से सिग्नल्स इकट्ठा करता है। उसका आंकलन कर संभावित खतरों पहचानता है।

साइबर सुरक्षा में नया इनोवेशन के लिए भारी निवेश। Huskeys ने तेज और स्मार्ट सिक्योरिटी सॉल्यूशन के साथ 8 मिलियन डॉलर जुटाए।

2025 स्टार्टअप की हुई थी स्थापना

बता दें कि, इस स्टार्टअप की स्थापना 2025 में इजरायली इंटेलिजेसइ इटाई गाफनी और रॉय वीसफेल्ड ने की थी। जिसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा सिस्टम को पार करना था। यह प्लेटफ़ॉर्म नियमों, नीतियों और कॉन्फ़िगरेशन को व्यवस्थित करता है। साथ ही सुरक्षा और वांछित व्यावसायिक परिणामों के लिए उनका लगातार मूल्यांकन करता है। दर्जनों वैश्विक संगठनों द्वारा पहले ही अपनाए जा चुके इस ESM प्लेटफ़ॉर्म को उन व्यवसायों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है जो राजस्व के मुख्य स्रोत के रूप में वेब ट्रैफ़िक पर निर्भर रहते हैं।

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कुछ ही मिनटों दे सकता है परिणाम

यह प्लेटफॉर्म डेटा सुरक्षा के साथ-साथ बिजनेस ऑपरेशन को बेहतर बना सकती है। कंपनी का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म कुछ मिनटों में एकत्रित होकर परिणाम देना शुरू कर सकता है। यह हप्तों की वजय समय कुछ ही मिनटों में अपना काम करना शुरू कर दे। कंपनी के सीईओ CEO Gafni ने कहा, अब टीमें अंदाज़ा लगाना बंद कर सकती हैं। अपने WAF को व्यवसाय में बाधा डालने वाले से हटाकर राजस्व बढ़ाने वाला टूल में बदल सकती है।

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कई बड़े निवेशकों ने लिया हिस्सा

बता दें कि इस इसमें दुनियां के कई नामचीन कंपनियों ने हिस्सा लिया। इनमें 10D, Alumni Ventures, सीसीएल,  मर्लिन वेंचर, एलवी एंजेल, The Players Fund, और toDay, का नाम शामिल है। कंपनी CrowdStrike के एक्सेलेरेटर प्रोग्राम में भी भाग लिया। यह निवेश आनेवाले समय में साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों का बिल आगे बढ़ा, जानें भारत क्यों निशाने पर है और 100% संभावित टैरिफ का क्या असर पड़ सकता है।  India-US Tariff: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल सीनेट में आगे बढ़ गया है। मंगलवार को हुए प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया। इसमें रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है।  US Russia Sanctions Bill में भारत क्यों आया निशाने पर?  इस प्रस्ताव का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है। बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देगा, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ताजा समझौते के मुताबिक, संभावित टैरिफ का दायरा रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों तक सीमित किया गया है। भारत और चीन इस सूची में महत्वपूर्ण देश माने जा रहे हैं।  भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर अमेरिकी कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नया दबाव बन सकता है।  READ MORE: हैदराबाद के टॉप 10 AI स्टार्टअप्स 2026   भारत पहले से झेल रहा 50% टैरिफ का दबाव  भारत पहले ही अमेरिकी टैरिफ को लेकर दबाव में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50% तक पहुंच गया था। अब नया प्रतिबंध विधेयक सामने आने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित कानून में राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध या टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।  रूस से तेल खरीद पर क्या होगा असर?  भारत के लिए रूसी तेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए एक अहम विकल्प रहा है। अगर अमेरिका इस बिल को कानून का रूप देता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है और कई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस की ऊर्जा आय घटेगी और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव पड़ेगा।  READ MORE: सेंसेक्स

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