ChatGPT Finance Feature: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव और उसका उसका तेजगति से इस्तेमाल ने टेक जगत को बदल रख देगा। दरअसल, ओपनएआई ने ChatGPT में Finance फीचर जोड़ा है। इस नए फाइनेंस डैशबोर्ड में यूज़र्स अपने खर्च, निवेश, सब्सक्रिप्शन, आने वाले बिल और मासिक लेनदेन का पूरा सारांश देख सकता है। इसके अलावा, एआई यह भी बताएगा कि कहां अनावश्यक खर्च हो रहा है या बचत कैसे बढ़ाई जा सकती है। यानी एक फाइनेंस असिस्टेंस की तरह काम करेगा। तो आइए जानते हैं इस उपयोगी फीचर के बारे में विस्तार से।
ओपनएआई और प्लेड की साझेदारी के बाद ChatGPT अब 12,000 से ज्यादा बैंक अकाउंट्स से जुड़ सकेगा। जानिए इस नए AI फीचर की खास बातें और प्राइवेसी चिंताएं।
सुविधा के साथ बढ़ी प्राइवेसी की चिंता
सुविधा तो इतनी जबरदस्त है कि आप सिर्फ एक प्रॉप्ट लिखेंगे कि मैं हर महीने कितना खर्च कर रहा हूं और किस हेड में अधिक खर्च कर रहा हूं। तो चैटजीपीटी झट से आपके बैंकिंग डेटा के आधार पर जवाब दे देगा। सेविंग और निवेश की भी सुझाव देगा। लेकिन इन खूबियां के साथसाथ डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर बहस भी तेज हो गई है। बैंक अकाउंट, खर्च और निवेश जैसी संवेदनशील जानकारी एआई प्लेटफॉर्म से जोड़ना कई विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यूजर्स को यह आजादी रहेगी की वो जब चाहे अपने बैंक अकाउंट डिस्कनेक्ट कर सकते हैं। इसके साथ ही फाइनेंशियल मेमोरी भी डिलिट कर सकते हैं। फिर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसे में साइबर सुरक्षा के खतरे बढ सकते हैं।
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AI कंपनियों के बीच बढ़ेगी नई प्रतिस्पर्धा
तकनीक जगत के जानकारों की माने तो ओपनएआई अपने चैटबॉट के जरिए स्मार्ट फाइनेंस प्लेटफार्म में भी बदलने की कोशिश कर रही है। अगर इसकी लोकप्रियता बढ़ी तो आनेवाले दिनों में अन्य कंपनियां भी एआई आधारित बैंकिंग और खर्च प्रबंधन सेवाएं शुरू कर सकती है। बता दें कि, कंपनी इसे फिलहाल, अमेरिका में ChatGPT Pro यूज़र्स के लिए वेब और iOS ऐप पर उपलब्ध कराया गया है। अगर इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो भविष्य में अन्य देशों और प्लेटफॉर्म्स पर भी इसका विस्तार किया जा सकता है।
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क्या AI पर भरोसा करेंगे लोग?
एक तरफ AI आधारित फाइनेंस मैनेजमेंट लोगों के लिए समय बचाने और बेहतर आर्थिक योजना बनाने का साधन बन सकता है, वहीं दूसरी तरफ कई यूज़र्स अपनी निजी बैंकिंग जानकारी किसी चैटबॉट के साथ साझा करने में सहज महसूस नहीं करेंगे। अब भी सवाल यही है कि क्या लोग अपने वित्तीय जानकारी एआई को सौंप देंगे?
