Google और SpaceX मिलकर अंतरिक्ष में भेजेंगे AI सेंटर?

Google और SpaceX मिलकर अंतरिक्ष में भेजेंगे AI सेंटर?

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May 16, 2026

Google AI Project: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google अब SpaceX के साथ मिलकर अंतरिक्ष में ऑर्बिटल डेटा सेंटर (Orbital Data Centre) बनाने की संभावना तलाश रही है। बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भारी वर्कलोड को संभालने के लिए तैयार किया जा सकता है।

क्या भविष्य में AI डेटा सेंटर अंतरिक्ष में होंगे? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google और Elon Musk की SpaceX इस दिशा में बड़ी योजना पर काम कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, Google और Elon Musk की कंपनी SpaceX के बीच इस विषय पर बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि यह चर्चा Google के Project Suncatcher से जुड़ी हो सकती है, जिसकी घोषणा 2025 के आखिर में की गई थी। इस प्रोजेक्ट के तहत 2027 तक Tensor Processing Units (TPU) वाले सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बताई गई है।

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने का क्या फायदा?

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि वहां सौर ऊर्जा (Solar Energy) लगातार उपलब्ध हो सकती है। AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती है। ऐसे में ऑर्बिटल डेटा सेंटर बिजली की खपत कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह काम इतना आसान भी नहीं है। कूलिंग सिस्टम, मेंटेनेंस और रॉकेट लॉन्च की लागत अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

क्यों SpaceX को सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा?

विशेषज्ञों का मानना है कि SpaceX इस साझेदारी के लिए सबसे मजबूत दावेदार हो सकती है। कंपनी रॉकेट लॉन्च की लागत कम करने और Reusable Rockets के इस्तेमाल के लिए जानी जाती है। बताया जा रहा है कि SpaceX का Falcon 9 rocket एक ही हार्डवेयर के साथ 34वीं उड़ान पूरी कर चुका है, जिससे लॉन्च खर्च कम करने में मदद मिल रही है।

यही वजह है कि Google जैसे बड़े टेक प्लेटफॉर्म SpaceX को गंभीरता से देख रहे हैं। इसके अलावा, SpaceX पहले भी बड़े ऑर्बिटल कंप्यूटिंग प्रोजेक्ट्स की तैयारी कर चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने इस साल की शुरुआत में AI कंपनी Anthropic के साथ भी एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया था।

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सबसे बड़ी चुनौती अब भी लागत

यह आइडिया काफी भविष्यवादी और रोमांचक लगता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या लागत ही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Google का मानना है कि अगर ऑर्बिटल AI इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत लगभग 200 डॉलर प्रति किलोग्राम तक आ जाए, तभी यह आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। वर्तमान में SpaceX की सामान्य लॉन्च दर लगभग 7,000 डॉलर प्रति किलोग्राम बताई जाती है, जो अभी काफी ज्यादा है।

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भविष्य बदल सकती है यह साझेदारी

SpaceX ने 2025 में अकेले 165 रॉकेट लॉन्च किए थे, जो दुनिया के बाकी देशों के कुल लॉन्च से भी ज्यादा बताए जाते हैं। कंपनी अब तक करीब 15,000 पेलोड्स अंतरिक्ष में भेज चुकी है। ऐसे में अगर Google और SpaceX की यह साझेदारी आगे बढ़ती है, तो यह सिर्फ AI इंडस्ट्री ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष तकनीक की दुनिया को भी पूरी तरह बदल सकती है। फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में मानी जा रही है, लेकिन इसे भविष्य की बड़ी टेक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

AI Pigeon Sprayer: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ मोबाइल या कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी में भी इस्तेमाल होने लगा है। इसका एक अनोखा उदाहरण Reddit पर वायरल हुआ है, जहां एक AI-पावर्ड सिस्टम बालकनी में आने वाले कबूतरों को पानी की फुहार से भगा देता है। इस अजीब लेकिन स्मार्ट इनोवेशन ने लोगों का ध्यान खींच लिया है। AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घर की बालकनी तक पहुंच गया है। जानें कैसे एक स्मार्ट सिस्टम कबूतरों को पहचानकर उन्हें पानी से भगा देता है। कबूतरों से परेशान होकर बना AI सिस्टम इस प्रोजेक्ट के क्रिएटर ने बताया कि उसकी बालकनी में एक कबूतर बार-बार घोंसला बनाने आ जाता था। इससे परेशान होकर उसने जाल या स्पाइक्स लगाने की बजाय एक ऑटोमैटिक AI सिस्टम बनाने का फैसला किया। यह सिस्टम खुद ही कबूतर को पहचानकर उसे भगाने का काम करता है। कैसे काम करता है यह AI सेटअप? यह पूरा सिस्टम एक USB कैमरा और Orange Pi 5 कंप्यूटर पर आधारित है। इसमें YOLO World V2 नाम का AI विजन मॉडल इस्तेमाल किया गया है, जो रियल टाइम में चीजों को पहचान सकता है। जैसे ही कैमरा कबूतर को डिटेक्ट करता है, सिस्टम तुरंत एक्शन लेता है। कबूतर पहचानने के बाद एक इलेक्ट्रिक वॉटर गन एक्टिव हो जाती है, जो Servo Motor से जुड़ी होती है। यह मोटर गन को कबूतर की दिशा में घुमा देती है और पानी की फुहार छोड़ दी जाती है। यह पूरा सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक है और इसमें इंसान की जरूरत नहीं होती। READ MORE: Microsoft का नया AI सिस्टम खुद खोजेगा साइबर कमजोरियां टेक्नोलॉजी और हार्डवेयर का इस्तेमाल इस प्रोजेक्ट में दो Servo Motor, रेसिस्टर, ट्रांजिस्टर और बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक वॉटर गन का इस्तेमाल किया गया है। इसकी प्रोसेसिंग Rockchip 3588 चिप के इनबिल्ट न्यूरल प्रोसेसर द्वारा होती है, जिससे यह तेज और सटीक तरीके से डिटेक्शन कर पाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रोजेक्ट जैसे ही यह प्रोजेक्ट Reddit पर पोस्ट हुआ, यह तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने मजाक में कहा कि AI अब सिर्फ चैटबॉट या काम के टूल तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह ‘बालकनी सिक्योरिटी सिस्टम’  भी बन गया है। कई यूजर्स ने इसे बहुत क्रिएटिव आइडिया बताया और इसकी टेक्निकल स्किल की भी तारीफ की। खास बात यह है कि इसमें कम कीमत वाले हार्डवेयर और ओपन-सोर्स AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। Read more: चीन के AI बाजार में बड़ी एंट्री चाहते हैं Jensen Huang AI का बढ़ता रोजमर्रा में इस्तेमाल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट दिखाते हैं कि AI अब आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है। सस्ते AI मॉडल और छोटे कंप्यूटर की मदद से लोग घर पर ही स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम बना सकते हैं। इस सिस्टम की खासियत इसकी लचीलापन है। इसे सिर्फ कबूतर ही नहीं, बल्कि गिलहरी, बिल्ली या दूसरे जानवरों को पहचानने के लिए भी सेट किया जा सकता है।
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