India Crypto Scams: क्या क्रिप्टो में मोटा मुनाफा कमाने का सपना लोगों को लगातार ठगी का शिकार बना रहा है? क्रिप्टो फ्रॉड के दो बड़े मामलों ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के हरदोई में 50 करोड़ की कथित ठगी का मामला सामने आया है, जबकि हिमाचल प्रदेश का 1,740 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला अब भी जांच और कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ है।
हरदोई में 50 करोड़ के क्रिप्टो फ्रॉड का मामला सामने आया, हिमाचल का 1,740 करोड़ का बड़ा घोटाला अब भी जांच में फंसा है।
हरदोई में 7.5% मासिक रिटर्न का लालच
हरदोई पुलिस ने Bombitex Exchange और BMax Reality से जुड़े 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि आरोपियों ने निवेशकों को हर महीने 7.5% तय रिटर्न का वादा किया। यानी ₹1 लाख लगाने पर हर महीने 7,500 मिलने का दावा किया गया। इतना ही नहीं, 1.35 लाख निवेश करने वालों को गोवा ट्रिप और 5 लाख से ज्यादा लगाने वालों को लखनऊ में प्लॉट देने का लालच भी दिया गया। जब भुगतान बंद हुआ तो निवेशकों को पैसे लौटाने के बजाय नई स्कीम में निवेश करने के लिए कहा गया। पुलिस अब पैसों के लेनदेन और पीड़ितों की संख्या की जांच कर रही है।
हिमाचल का मामला अब भी अधूरा
हिमाचल प्रदेश में 2018 से 2022 के बीच करीब 2.5 लाख लोगों ने कथित क्रिप्टो एमएलएम योजना में निवेश किया। कुल निवेश 1,740 करोड़ तक पहुंचा, जबकि जांच एजेंसियों के मुताबिक वास्तविक धोखाधड़ी करीब 500 करोड़ की है। अब तक पुलिस 76 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन इनमें से 69 आरोपी जमानत पर बाहर हैं। हैरानी की बात यह है कि किसी भी आरोपी के खिलाफ अभी तक मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हुई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच कर रहा है और अब तक 2 गिरफ्तारियां कर चुका है। मुख्य आरोपी के दुबई में होने की आशंका जताई जा रही है।
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दोनों मामलों में ठगी का तरीका लगभग एक जैसा
दोनों मामलों में निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का लालच दिया गया और नए लोगों को जोड़ने पर अतिरिक्त कमाई का वादा किया गया। इस तरह एक चेन बनाई गई, जिसमें पुराने निवेशक ही नए लोगों को जोड़ने लगे। हिमाचल में डिजिटल कॉइन की कीमत खुद तय की जाती थी। इसकी कीमत 70 से बढ़ाकर 4,000 तक बताई गई। हरदोई में भी इसी तरह रेफरल मॉडल के जरिए लोगों को जोड़कर निवेश बढ़ाया गया।
देशभर में बढ़ रहे हैं क्रिप्टो फ्रॉड के मामले
हाल के दिनों में प्रवर्तन निदेशालय ने 303 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भी खुलासा किया है। इसके अलावा 3.35 करोड़ की डिजिटल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। एजेंसियों का कहना है कि क्रिप्टो से जुड़े आर्थिक अपराधों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन विदेशों में बैठे आरोपियों तक पहुंचना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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हरदोई का मामला अभी शुरुआती जांच में है, लेकिन हिमाचल का अनुभव बताता है कि ऐसे मामलों में निवेशकों को पैसा वापस मिलने में वर्षों लग सकते हैं इसलिए किसी भी क्रिप्टो योजना में निवेश से पहले उसके दावों और वैधता की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।
