Cargo Theft Cybercrime: समय के साथ अब चोरी करने का तरीका भी बदलता जा रहा है। पहले कार्गों चोरी करने मतलब था राह चलते ट्रक को लूट लेना। लेकिन अब वह दौर अतीत बनता हुआ दिखाई दे रहा है। अब अपराधी भी डिजिटल दुनियां में घुसकर बिना किसी हथियार के करोड़ों रूपए का माल गायब कर रहे हैं। इसको लेकर अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने चेतावनी दी है कि हैकर आधारित कार्गो चोरी तेजी से बढ़ रही है। तो आइए जानतें हैं कैसे घटना को दे रहा है अंजाम क्या कहते हैं आंकड़े।
पारंपरिक चोरी से आगे बढ़कर अब साइबर क्राइम के जरिए कार्गो चोरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जानें पूरा मामला।
नुकसान और गिरोहों की सक्रियता
आकंड़े बताते हैं कि पिछले साल 2025 में कार्गो चोरी से करीब 700 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। जो साल 2024 के मुकाबले 60 प्रतिशत अधिक है। ये अपराधी छोटी-मोटी कीमतों वाले सामान पर हमला नहीं बोलते। ये तो उच्च कीमतों वाले सामान को टारगेट करते हैं। इनमें, इलेक्ट्रिक, मेडिसिन, लग्जरी उत्पाद के नाम शामिल हैं। अपराधी इसे बड़े ही हाईटेक तरीके से अंजाम देते हैं।
घटना को इस तरह से देता है अंजाम
आप को लग रहा होगा कि यह घटना किसी बड़े गिरोह द्वारा धमकी वगैराह देकर किया जाता होगा लेकिन ऐसा नहीं है। यह साइबर हमला एक सामान्य दिखने वाले ईमेल से शुरू होता है। शिपिंग ब्रोकर्स को भेजे गए ये मेल देखने में बिल्कुल बिजनेस रिक्वेस्ट जैसे लगते हैं। लेकिन इनमें छिपे लिंक यूजर्स को फिशिंग साइट पर ले जाते हैं। वहां से मैलवेयर डाउनलोड हो जाता है और हमलावर कंपनी के सिस्टम तक पहुंच बना लेते हैं।
लोड बोर्ड का दुरुपयोग: असली काम के बीच नकली जाल
ये हैकर्स काफी शातिर तरीके से काम करते हैं। तरह-तरह के हथकंडे का इस्तेमाल करते हैं। ये पहले सिस्टम की खामियां को समझते हैँ। फिर उसे अपने जाल में फसाने का प्रयास करते हैं। ये हैकर्स ट्रकिंग लोड बोर्ड्स का भी फायदा उठाते हैं। ये वही प्लेटफॉर्म हैं जहां कंपनियां अपने फ्रेट पोस्ट करती हैं। हैकर्स फर्जी लिस्टिंग डालकर असली कैरियर्स को फंसाते हैं। जैसे ही वे डॉक्यूमेंट डाउनलोड करते हैं, उनका सिस्टम भी वायरस से प्रभावित हो जाता है।
READ MORE- हैकर्स के खिलाफ तैयार कंपनियां, Sygnia की रणनीति ने मारी बाजी
सिस्टम में घुसकर असली बनकर ठगी
फिर अपना खेल शुरू करते हैं। वे असली कैरियर्स की पहचान चुरा लेते हैं। फिर उन्हीं के नाम से बड़े और महंगे शिपमेंट्स के लिए बोली लगाते हैं। कई मामलों में वे सरकारी डेटाबेस में भी बदलाव कर देते हैं ताकि सब कुछ असली लगे। इतना ही नहीं, जब कॉन्ट्रैक्ट मिल जाता है, तो अपराधी एक और चाल चलते हैं। जिसे डबल ब्रोकिंग कहा जाता है। इसमें वे किसी अनजान ड्राइवर को सामान उठाने के लिए भेजते हैं। फिर माल को जल्दी से दूसरी गाड़ी में ट्रांसफर कर ब्लैक मार्केट में बेच दिया जाता है।
READ MORE- ईवीएम सुरक्षा को लेकर कोलकाता में सियासी बवाल! प्रशासन सख्त
माल के बदले पैसे की मांग
एजेंसी के मुताबिक कुछ मामलों में ये हैकर्स माल को छुपाकर भी रखते हैं। फिर फिरौती भी मांगते हैं। वे असली ब्रोकर्स से पैसे लेकर ही माल का पता बताते हैं। कुछ मामलों में अपराधी माल को छिपाकर रखते हैं और फिरौती मांगते हैं। वे असली ब्रोकर्स से पैसे लेकर ही माल का पता बताते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इसे पहचाने कैसे तो एफबीआई ने कुछ हिंट दिए हैं जिनमें, अनजान ईमल आईडी, संदिग्ध लिंग, अनजान शिपमेंट और ईमेल सेटिग्स में अनुमति के बदलाव आदि खतरे के संकेत हो सकते हैं। जिसे ध्यान रखने की जरूरत है।
बता दें कि आजकल कार्गो कंपनी ट्रांसपोर्ट और टेक्नोलॉजी दोनों पर निर्भर है। ऐसे में लॉजिस्टिक कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी पर अधिक ध्यान देना होगा।
