EVM strongroom controversy: मतगणना से पहले ही कोलकाता में राजनीतिक माहौल अचनाक गरमा गया। लोग एक तरफ चुनाव नतीजे के इंतजार में हैं। तो वहीं, दूसरी तरफ ईवीएम सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दौरे और तृणमूल के विरोध के बाद कोलकाता के EVM स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा बढ़ाई गई। कोलकाता पुलिस ने उन सात इलाकों में किसी भी तरह की भीड़ जमा होने पर रोक लगा दी है। इस घटना के बाद से पूरे देश का ध्यान कोलकाता के कॉउंटिंग सेंटर की ओर खींच लिया है।
EVM स्ट्रॉन्गरूम विवाद पर प्रशासन सख्त, पुलिस अलर्ट मोड में, मतगणना से पहले बढ़ा तनाव। टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने।
विवाद के बाद सुरक्षा का कड़ा घेरा
बढ़ते विवाद को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और सात प्रमुख इलाकों में धारा 144 जैसे प्रतिबंध लागू कर दिया। जिसमें, शहीद खुदीराम बोस रोड, जजेस कोर्ट रोड, जादवपुर, डायमंड हार्बर रोड, लॉर्ड सिन्हा हॉल, नरेश मित्रा सरणी और प्रमाथेश बरुआ सरणी शामिल है। बात दें कि यह वे इलाके हैं जहां विधानसभा चुनाव के मतगणना होनी है। यह कदम कल रात दो काउंटिंग सेंटरों पर हुए भारी हंगामे के बाद उठाया गया है, जब तृणमूल कांग्रेस ने संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगाए थे।
टीएमसी ने उठाए सवाल फिर मचा बवाल
सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि कुछ जगहों पर संदिग्ध गतिविधियां देखी गई। उनका आरोप है कि ईवीएम से जुड़ी कुछ प्रक्रियाएं पारदर्शी नहीं लग रही है। बीते रात, टीएमसी के नेताओं के आरोप के बाद कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में बने एक काउंटिंग सेंटर के बाहर BJP और TMC कार्यकर्ताओं के बीच आमना-सामना हो गया। काउंटिंग सेंटर के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शाखवत मेमोरियल काउंटिंग सेंटर पर बने स्ट्रॉन्ग रूम के पास आई थीं। जो इस घटनाक्रम को और हवा दे दिया।
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चुनाव आयोग ने दी सफाई
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने तृणमूल के आरोपों को पहले ही खारिज कर दिया है। उन्होंने सभी आरोपों के निराधार और गलत बताया है। उनका कहना है सभी स्ट्रॉगरूम को उम्मींदवार और उनके एजैंटों की मौजूदगी में सील की गई है। आखिरी स्ट्रॉन्ग रूम गुरुवार सुबह 5.15 बजे बंद किया गया था। खुदीराम अनुशीलन केंद्र में पोस्टल बैलेट के लिए एक और स्ट्रॉन्ग रूम है। विभिन्न केंद्रों से आए पोस्टल बैलेट वहाँ रखे गए हैं। चुनाव अधिकारी उनकी छँटाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने रिटर्निंग अधिकारियों को भी निर्देश दिया था कि वे इस प्रक्रिया के बारे में संबंधित उम्मीदवारों और एजेंटों को सूचित करें।
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टॉर्च की रोशनी ने बढ़ाया भ्रम
चुनाव अधिकारी ने बताया कि पोस्टल बैलेट की छंटनी के दौरान टार्च का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रांगरूम के अंदर लोगों ने गलत समझ लिया और इसे संदिग्ध गतिविथि मान लिया। चुनाव आयोग के इस बयान के बाद विरोध शांत हुआ है लेकिन सभी की नजरें मतगणना के नतीजों पर हीं टिकी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि स्ट्रॉन्ग-रूम में बिजली का कनेक्शन लगाने की अनुमति है, इसलिए कोलकाता के सात विधानसभा क्षेत्रों के लिए पोस्टल बैलेट को अलग करने का काम टॉर्च की रोशनी में चल रहा था, जिसे सत्ताधारी तृणमूल नेताओं ने गलत तरीके से “संदिग्ध गतिविधियां” करार दिया था।
चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारी की इन टिप्पणियों के बाद, तृणमूल नेताओं ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया और मौके से चले गए।
