हैकर्स के वार से पहले ही एयरटेल की 'Claude Mythos' डिजिटल किलेबंदी शूरू

हैकर्स के वार से पहले ही एयरटेल की ‘Claude Mythos’ डिजिटल किलेबंदी शूरू

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April 24, 2026

Airtel Claude Mythos : डिजिटल दुनिया में सुरक्षा के मायने अब बदलने वाले हैं। देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने अगली पीढ़ी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाले साइबर खतरों से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी अपने वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं और तकनीकी भागीदारों के साथ मिलकर कमियों भरपाई करने में जुटी हुई है।

क्या AI आपके टेलीकॉम नेटवर्क में सेंध लगा सकता है? जानें कैसे भारती एयरटेल ‘Claude Mythos’ जैसे एडवांस AI मॉडल से साइबर सुरक्षा खतरों को कम कर रही है।

सुरक्षा का नया मॉडल ‘Claude Mythos’

​इस पूरे मामले के केंद्र में Anthropic का सबसे उन्नत एआई  मॉडल Claude Mythos है। यह मॉडल पारंपरिक ऑडिटिंग सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक गहराई से काम करता है। पुराने सिस्टम जाने-पहचाने खतरों को ढूंढते थे। लेकिन यह नया मॉडल सॉफ्टवेयर की कोडिंग में छिपे उन सूक्ष्म ‘बग्स’ को भी पहचान लेता है। जिसे इंसान भी सही नहीं ढूंढ पाते हैं। एयरटेल के लिए चुनौती यह है कि अगर यह तकनीक सुरक्षा बढ़ा सकती है, तो इसका गलत इस्तेमाल नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।

नेटवर्क दिग्गजों के साथ एयरटेल की घेराबंदी

​एयरटेल के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी  Randeep Sekhon के अनुसार, स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है। लेकिन हम खतरा लेने की स्थिति में नहीं हैं। एयरटेल अब इरेशन, नोकिया और सिस्को जैसे अपने बुनियादी ढांचा प्रदाताओं के साथ मिलकर एक फास्ट-ट्रैक पैचिंग सिस्टम पर काम कर रहा है। मतलब कंपनियां यह चाहती है कि जब तक कोई हैकर एआई का उपयोग करके सिस्टम में सेंध लगाए,  अपने वेंडर्स के साथ मिलकर उन होल को बंद करना होगा।

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हुआ डिजिटल युद्ध का नया दौर

​यह केवल एयरटेल की समस्या नहीं है। Vodafone Idea  के सीईओ अभिजीत किशोर ने भी स्वीकार किया है कि क्लाउड मिथोस जैसे उन्नत एआई  सिस्टम उद्योग के लिए एक अवसर और चुनौती दोनों हैं। यह लड़ाई अब एआई  बनाम ऑफेंसिव एआई का है। टेलिकॉम ऑपरेटरों को अब अपनी Security Architecture  को एआई नेटिव बनाना होगा, ताकि वे वास्तविक समय में खतरों को भांप सकें।

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सॉफ्टवेयर पैचिंग की रफ़्तार में आएगा बड़ा बदलाव

​इस तकनीक के आने टेक कंपनियों को बड़ा फायदा होगा। उन्हे अपने सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए हफ्तों का समय नहीं मिलेगा। एआई की वजह से खतरों की खोज और उनका फायदा उठाने की गति इतनी तेज हो गई है कि कंपनियों को अब घंटों या मिनटों में पैच जारी करने होंगे। एयरटेल की यह सक्रियता से यही बात समझ में आ रही है कि भविष्य में केवल वही नेटवर्क सुरक्षित रहेगा जो एआई की नजर से खुद को परखता रहेगा।

​एआई के इस दौर में सुरक्षा एकबार की जानेवाल प्रक्रिया नहीं है इसके लिए कंपनियों को लगातार चलनेवाली डिजिटल लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। यह अन्य टेलीकॉम कंपनी के लिए एक बड़ा मैसेज हो सकता है।

Rahul Ray

मैं एनेलिटिक्स इनसाइट के लिए टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोकरेंसी, साइबर सिक्योरिटी, गैजेट्स, मोबाइल ऐप्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म को कवर करता हूं। मुझे
मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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