AAP Rajya Sabha MPs resignation: राजनीति में कब क्या खेल हो जाए कोई कह नहीं सकता। लेकिन अचानक एक ऐसी खबर जिसके सामने आने मात्र से दिल्ली से लेकर पंजाब तक की सियासत में भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी के कभी सबसे भरोसेमंद चेहरे रहे राघव चड्ढा ने पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने का ऐलान कर दिया है। जिससे राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के अस्तित्व पर संकट है खड़ा हो गया है। क्योंकि उनके एक सांसद नहीं 7 सांसद एक साथ पाला बदलने जा रहे हैं।
क्या ‘आप’ की ईमानदारी वाली राजनीति खत्म हो गई? राघव चड्ढा ने लगाए गंभीर आरोप और 7 राज्यसभा सांसदों के साथ किया भाजपा की ओर रुख।
ईमानदारी की राजनीति पर सवाल और बड़ा प्रहार
महज 37 साल की उम्र में पार्टी के दिग्गज रणनीतिकार माने जाने वाले राघव चड्ढा ने अपने बाहर निकलने का कारण बेहद गंभीर बताया है। अशोक मित्तल और संदीप पाठक जैसे कद्दावर नेताओं के साथ मीडिया के सामने आते ही चड्ढा ने कहा, मैंने अपने जीवन के 15 साल जिस पार्टी को दिए, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और ईमानदारी की राजनीति से भटक गई है। चड्ढा ने अपनेआप को गलत पार्टी में सही व्यक्ति करार देते हुए कहा कि अब उनका लक्ष्य लोगों की सेवा करना है, न कि सत्ता के मोह में फंसी राजनीति।
संविधान की ढाल: अयोग्यता से बचने की सोची-समझी रणनीति
बाते दें कि यह इस्तीफा झटपट में लिया गया फैसला नहीं है। यह तो बिल्कुल सोची-समझी रणनीति के तहत लिया गया निर्णय है। राजनीति विशेषज्ञों की माने तो अगर राधव चड्ढा अकेले इस्तीफा देते, तो उनपर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती थी। उनकी सदस्यता रद्द हो सकती थी। लेकिन, संविधान के अनुसार यदि किसी पार्टी के दो तिहाई सांसद या विधायक एक साथ किसी अन्य दल में शामिल होते हैं तो उनकी सदस्यता सुरक्षित रहती है। आम आदमी पार्टी की राज्यसभा में 10 सांसद हैं। इनमें से 7 सांसद पाला बदलने जा रहे हैं जिनमें, राधव चड्ढा, मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी का नाम शामिल है। इन सभी ने एक साथ राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को पत्र सौंपकर इस विलय की औपचारिकता पूरी कर ली है।
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भीतर सुलग रही थी असंतोष की आग
जानकारों की मानें तो यह बगावत रातों-रात नहीं हुई। पंजाब और दिल्ली की लीडरशिप के साथ कई मुद्दों पर चल रही अनबन और राघव चड्ढ़ा का कदम करने के मामले ने इस बगावत को और तेज कर दिया। अब इन दिग्गजों के जाने से पंजाब में भगवंत मान सरकार और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पकड़ पर बड़े सवालिया निशान लग गए हैं।
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ऑपरेशन लोटस बनाम बगावत
पार्टी में हुई बगावत पर आप की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन सातों सांसदों पर हमला बोला। उन्होंने इसे भाजपा का ऑपरेशन लोटस करार देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी सस्ती राजनीति कर रही है। लेकिन सवाल यह उठ रहे हैं कि आगे क्या होगा। राज्यसभा में अपनी ताकत खोने के बाद आप के सामने अब अपने कैडर को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
अब देखना यह होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संकट से उभरने के लिए कौन सा नया रास्ता अपनाते हैं।
