Ransomware negotiator case: Cyber security की दुनिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कंपनियों को बचाने वाला ही उनके खिलाफ काम करता पाया गया। कंपनी ने एक पेशेवर Ransomware नेगोशिएटर को साइबर हमलों से मदद के लिए नियुक्त किया था। लेकिन उसने खुद अपराधियों से मिलकर हमलों को बढ़ावा देने का काम किया। यह घटना दिखाती है कि डिजिटल सुरक्षा में अंदरूनी खतरे कितने गंभीर हो सकते हैं।
BlackCat गैंग के साथ मिलकर करोड़ों की फिरौती वसूलने वाले साइबर एक्सपर्ट का कबूलनामा, जानें पूरी कहानी।
अपराधियों से गुप्त सांठगांठ
बता दें कि एंजेलो मार्टिनो नाम के एक व्यक्ति ने 2023 में कुख्यात BlackCat रैनसमवेयर गैंग के साथ हाथ मिला लिया। वह पीड़ित कंपनियों के लिए बातचीत करने के बजाय, हमलावरों को ही ऐसी जानकारी देने लगा जिससे वे ज्यादा रकम वसूल सकें। यह सहयोग अप्रैल 2023 से शुरू हुआ और कई महीनों तक चलता रहा। मार्टिनो ने जिन कंपनियों की ओर से बातचीत की, उनकी बेहद संवेदनशील जानकारियां जैसे, बीमा पॉलिसी की सीमा और बातचीत की रणनीति चुपके से हैकर्स को दे दीं। इससे हमलावरों को यह समझने में मदद मिली कि पीड़ित कितनी रकम तक भुगतान करने को तैयार हैं, और उसी हिसाब से फिरौती की रकम बढ़ा दी गई।
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अंदरूनी नेटवर्क का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि मार्टिनो अकेला नहीं था। उसने दो अन्य साइबर सुरक्षा पेशेवरों, रयान गोल्डबर्ग और केविन मार्टिन के साथ मिलकर कई अमेरिकी कंपनियों पर रैनसमवेयर हमले करवाए। ये सभी अलग-अलग कंपनियों में काम करते थे। जिससे इस अपराध को अंजाम देना और आसान हो गया। एक मामले में तो आरोपियों ने करीब 1.2 मिलियन डॉलर बिटकॉइन में वसूले। बाद में इस रकम को आपस में बांटकर अलग-अलग तरीकों से छिपाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों ने मार्टिनो के पास से लगभग 10 मिलियन डॉलर की संपत्ति जब्त की। जिसमें डिजिटल करेंसी, लग्जरी बोट, गाड़ियां और यहां तक कि एक फूड ट्रक भी शामिल है।
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कानूनी शिकंजा और सजा का खतरा
मार्टिनो ने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया है। उसे 9 जुलाई 2026 को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले में उसे अधिकतम 20 साल की जेल हो सकती है। उसके साथी पहले ही 2025 में दोषी ठहराए जा चुके हैं और उनकी सजा भी जल्द तय होने वाली है। लेकिन इस घटना ने साइबर सुरक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सिस्टम पर कंपनियां भरोसा करती हैं, वहीं अगर अंदर से समझौता हो जाए तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
इससे यही जानकारी मिलती है कि कंपनियों को सिर्फ बाहरी हमलों से नहीं बल्कि अंदरूणी खतरो से बचाव पर ध्यान देने होंगे। नहीं तो बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।
