मिडिल ईस्ट संकट के बीच डॉलर के सामने फिसला रुपया

मिडिल ईस्ट संकट के बीच डॉलर के सामने फिसला रुपया

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March 27, 2026

Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया 27 मार्च को अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया है। रुपया पहली बार 94 प्रति डॉलर के स्तर को पार करते हुए 94.56 प्रति डॉलर तक गिर गया है। दिनभर इसमें करीब 0.5% की गिरावट दर्ज की गई है। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ रही है, खासकर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से।

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंचा, मिडिल ईस्ट संकट, तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती से रुपये पर लगातार दबाव बना।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ा तेल और एनर्जी प्रेसर

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। आशंका है कि यह संकट लंबे समय तक जारी रह सकता है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है क्योंकि भारत अपनी बड़ी जरूरत का तेल बाहर से खरीदता है। तेल महंगा होने से देश का खर्च बढ़ता है और इसका सीधा असर रुपये की कीमत पर पड़ता है। यही कारण है कि रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ी अनिश्चितता

इस पूरे हालात का असर सिर्फ करेंसी पर नहीं, बल्कि दुनिया के शेयर बाजारों और बॉन्ड मार्केट पर भी दिख रहा है। बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और निवेशक सतर्क हो गए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने भी स्थिति को और उलझा दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के अनुरोध पर 10 दिनों के लिए हमले रोके जा सकते हैं और बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो दबाव और बढ़ाया जाएगा। वहीं, ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को एकतरफा और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है। दोनों देशों के अलग-अलग बयानों की वजह से बाजार में भरोसा कमजोर हुआ है और अनिश्चितता और बढ़ गई है।

डॉलर की मजबूती से रुपये पर और दबाव

इस समय अमेरिकी डॉलर भी मजबूत स्थिति में है। डॉलर इंडेक्स करीब 99.9 के स्तर पर है, जो 100 के अहम स्तर के बहुत करीब है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरी करेंसी, खासकर भारत की करेंसी दबाव में आ जाती है। यही वजह है कि रुपया और कमजोर हो रहा है। इन मुश्किल हालात के बीच एक अच्छी खबर भी आई है। ईरान ने कहा है कि वह पांच देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने देगा। इनमें भारत भी शामिल है। इसके अलावा रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक को भी यह सुविधा दी गई है। यह भारत के लिए राहत की बात है क्योंकि भारत का बहुत सारा तेल इसी रास्ते से आता है। इससे तुरंत सप्लाई रुकने का खतरा कम हो गया है, हालांकि पूरी समस्या अभी खत्म नहीं हुई है।

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रुपये का आगे क्या होगा?

CR Forex Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबारी के अनुसार, फिलहाल बाजार में उम्मीद और डर दोनों बना हुआ हैं। अगर वैश्विक तनाव कम होता है तो रुपया 1 से 1.5 रुपये तक मजबूत हो सकता है। उन्होंने बताया कि 94.00 से 94.20 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस है, जहां रिजर्व बैंक की मौजूदगी देखने को मिल सकती है। वहीं. नीचे की तरफ 92.80 से 93.00 का स्तर सपोर्ट जोन है।

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आगे की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

बिजनेस हेड हर्षल दासानी के अनुसार, असली चिंता रुपये का स्तर नहीं है, बल्कि यह है कि अगर रुपया 95 के पार चला जाता है तो RBI इसे कैसे संभालेगा। उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की मजबूती मिलकर दबाव बना रहे हैं। इससे उन सेक्टरों पर असर पड़ेगा जो कच्चे माल या ईंधन पर निर्भर हैं। वहीं, एक्सपोर्ट और कुछ सुरक्षित सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

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