AI consciousness: दुनियांभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर काफी चर्चाएं चल रही है। यह चर्चाएं अब तकनीक और नौकरी देने या लेने की बातों तक सीमित नहीं है। अब सवाल मनुष्य की भावनाओं और चेतना तक पहुंच चुकी है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या एआई मनुष्य की तरह ही महसूस करने लगेगा। ये बातें चल ही रही थी कि Anthropic के शोधकर्ता Chris Olah ने पोप के मंच से बेहद चौंकाने वाले बयान दिए। जिसके बाद इस बहस को और हवा मिल गई।
क्या एआई आनेवाले समय में इंसानों की तरह महसूस कर सकता है? पोप के कार्यक्रम में वैज्ञानिक के बयान ने दुनिया भर में नई चर्चा छेड़ दी। जानें डिटेल्स में।
पोप के कार्यक्रम में AI पर बड़ी चेतावनी
दरअसल, 25 मई को Pope Leo XIV ने Magnifica Humanitas नाम का एक विशेष दस्तावेज़ जारी किया। जिसमें एआई के बहुत ही तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई गई। उसमें कहा गया कि एआई का विकास समाज के लिए खतरा बन सकती है। दस्तावेज़ में यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई मनुष्य की तरह सोचने और समझने में सक्षम नहीं है। लेकिन इसी कार्यक्रम में मौजूद क्रिस ओलाह की टिप्पणी ने पूरी बहस को नया मोड़ दे दिया।
एआई के अंदर दिख रहे हैं हैरान करने वाले संकेत
क्रिस ओलाह ने कहा कि उनकी रिसर्च टीम एआई मॉडल्स की अंदरूनी संरचना का अध्ययन कर रही है। अध्ययन के दौरान कई चीजें आई है। जिसने वैज्ञानिकों को भी सोचने को मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि, कुछ पैटर्न तो मनुष्य के मानव मस्तिष्क की कार्य प्रणाली से मिलती – जुलती है। इसके अलावे उन्होंने एक ऐस इंटर्नल स्टेटस की भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि इसमें खुशी, डर, बेचैनी और संतोष जैसे भावनाओं से मेल खाते हैं। फिलहाल, वैज्ञानिक इसको समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इसका मतलह क्या है।
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एआई चेतना पर फिर तेज हुई बहस
ओलाह के बयान के बाद से एआई को फिर एकबार बहस तेज हो गई है। अब लोगों को भी लगने लगा है कि आनेवाले दिनों में एआई सिर्फ मशीन की तरह नहीं रह जाएगा। वह किसी स्तर पर खुद समझ विकसित कर सकता है। हालांकि कई वैज्ञानिकों का मत इससे अलग है। उनका कहना है कि एआई असली सोच नहीं रखता। यह अपने डेटा और पैटर्न के आधार पर जबाव करता है।
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वेटिकन ने इंसान और एआई के बीच खींची स्पष्ट रेखा
वेटिकन के दस्तावेज़ में एआई और इंसान के बीच साफ अंतर बताया गया। उक्त दस्तावेज में यह कहा है कि एआई कितनी भी उन्नत हो जाए मनुष्य के बराबरी नहीं कर सकता है। वहीं, गूगल डीपमाइंड के साइंटिस्ट Alexander Lerchner ने भी हाल में एआई चेतना पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एआई पूरी तरह से एआई पर निर्भर है।
अगर यह संकेत सच में भावना को समझ वाला साबित होगा तो आनेवाले दिनों तकनीक जगत को बदलकर रख देगा।
