Zoho Founder Sridhar Vembu: Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की सफलता को लेकर चल रही आम धारणा को खारिज किया है। अक्सर कहा जाता है कि भारतीय ‘परफॉर्म या पेरिश’ की मानसिकता और कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से पश्चिमी कंपनियों में आगे बढ़ते हैं। वेम्बु ने इसे सही नहीं माना और कहा कि असली कारण भारतीयों की संगठन के प्रति लॉयल्टी और लंबे समय तक काम करने की आदत है।
Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने बताया कि भारतीयों की अमेरिका में सफलता सिर्फ दबाव या प्रतिस्पर्धा की वजह से नहीं, बल्कि संगठन के प्रति लॉयल्टी, लंबे समय तक काम करना और इमिग्रेंट ड्राइव जैसी विशेषताओं की वजह से है।
संगठन के प्रति लॉयल्टी और लंबे समय तक टिकना
वेम्बु के अनुसार, भारतीय कर्मचारी अपने संगठनों के प्रति बहुत वफादार होते हैं। वे लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करते हैं, जबकि कई अन्य समूह जल्दी छोड़ देते हैं। इसी लॉयल्टी और लगातार काम करने की प्रवृत्ति के कारण उन्हें प्रमोशन मिलती है और भारतीय कई अमेरिकी कंपनियों में टॉप पदों पर पहुंच जाते हैं।
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इमिग्रेंट ड्राइव का योगदान
वेम्बु ने कहा कि यह केवल भारतीयों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में हर नई प्रवासी समुदाय ने पहले से मौजूद लोगों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसे वह ‘इमिग्रेंट ड्राइव’ कहते हैं। भारतीयों की संगठन के प्रति लॉयल्टी और इस इमिग्रेंट ड्राइव का मेल ही अमेरिका में उनकी सफलता का असली कारण है।
सामाजिक सुरक्षा और परिवार की भूमिका
वेम्बु ने बताया कि भारत में विस्तारित परिवार और सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क लोगों को मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसी वजह से भारतीय कर्मचारी अपने संगठन को परिवार की तरह मानते हैं इसलिए अमेरिकी कंपनियों में We are one family का नारा सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि भारतीय कर्मचारियों की संस्कृति में यह वास्तविकता के करीब है।
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आर्थिक और सामाजिक समर्थन
वेम्बु ने उदाहरण दिया कि वह एक स्कूल चलाते हैं, जिसमें 200 से अधिक बच्चे शामिल हैं, जो गरीब परिवार से आते हैं। वे कहते हैं कि केवल आर्थिक सहायता काफी नहीं है, जब सामाजिक और पारिवारिक आधार टूटता है, तो सुधार करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि वह उन विचारधाराओं का विरोध करते हैं, जो भारत में सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश करती हैं।
