भारत-अमेरिका ट्रेड डील से शेयर बाजार में आई नई जान

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील से शेयर बाजार में आई नई जान
February 3, 2026

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए लंबे इंतजार वाले व्यापार समझौते ने 3 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह भर दिया। निवेशकों को उम्मीद है कि यह डील सिर्फ बाजार के लिए नहीं, बल्कि निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। पिछले कई महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे थे, जिससे बाजार की रफ्तार धीमी पड़ी हुई थी।

Axis Securities का मानना है कि यह समझौता भारत की मध्यम अवधि की आर्थिक वृद्धि और बाहरी स्थिरता के लिए पॉजिटिव है। बेहतर बाजार पहुंच और टैरिफ में स्पष्टता से निर्यात बढ़ सकता है, मैन्युफैक्चरिंग में निवेश तेज हो सकता है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

नई भारत-अमेरिका व्यापार संधि ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। बाजार में तेजी आई है और उम्मीद है कि FII निवेश फिर से भारतीय शेयर बाजार में लौट सकता है।

बाजार की तेज शुरुआत ने बढ़ाया भरोसा

डील की घोषणा के बाद बाजार ने जोरदार शुरुआत की। Nifty 50, Index 26,308 पर खुला और जल्दी ही 26,341 के स्तर तक पहुंच गया। BSE Sensex भी 85,323 पर खुलकर 85,871 तक चढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही बड़ी बढ़त ने यह दिखा दिया कि निवेशक इस समझौते को लेकर काफी आशावादी हैं।

FIIs की बिकवाली अब भी चिंता

हालांकि, बाजार में तेजी दिखी, FIIs अभी भी 2025 में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 से अब तक FIIs ने 1,06,606 करोड़ की निकासी की है। केवल जनवरी में ही 35,962 करोड़ की बिकवाली हुई। पूरे साल में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 1,66,286 करोड़ तक पहुंच गया।

बता दें कि यह बिकवाली तब शुरू हुई जब अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। 2024 से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बना रहा, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा। फिर भी, फरवरी के पहले दो दिनों में FIIs ने 1,906 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की, जो सुधार का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।

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घरेलू निवेशकों ने संभाला मोर्चा

जब FIIs बिकवाली कर रहे थे, तब घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया। Motilal Oswal Financial Services के अनुसार, 2025 में DII निवेश 90.1 बिलियन डॉलर रहा, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 2016 से 2025 के बीच DIIs ने कुल 255.8 बिलियन डॉलर निवेश किया है।

क्या ट्रेड डील से लौटेंगे विदेशी निवेशक?

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत आर्थिक आधार FIIs को वापस ला सकते हैं। Green Portfolio PMS के दिवम शर्मा के अनुसार, भारत उभरते बाजारों में सबसे मजबूत विकल्प बन सकता है और विदेशी पूंजी का बड़ा हिस्सा यहां लौट सकता है।

SMC Global Securities की सीमा श्रीवास्तव कहती हैं कि यह समझौता नीति स्थिरता और विकास के संकेत देता है। इससे निर्यात आधारित सेक्टरों में वैल्यूएशन बढ़ सकता है और मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। MOSL का भी मानना है कि अनिश्चितता का दौर खत्म होने से FIIs की वापसी संभव है।

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किन सेक्टरों में दिख सकती है तेजी

Geojit Investments के वीके विजयकुमार के मुताबिक, बड़ी कंपनियां FII निवेश का सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगी। बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस, टेलीकॉम, कैपिटल गुड्स और आईटी सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।

Ragini Sinha

5 साल के अनुभव के साथ मैंने मीडिया जगत में कंटेट राइटर, सीनियर कंटेंट राइटर, मीडिया एनालिस्ट और प्रोग्राम प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया है। बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव को मैंने कवर किया है। अपने काम को लेकर मुझे पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। काम को जल्दी सीखने की कला मुझे औरों से अलग बनाती है।

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