अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों का बिल आगे बढ़ा, जानें भारत क्यों निशाने पर है और 100% संभावित टैरिफ का क्या असर पड़ सकता है। India-US Tariff: अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक बड़ा बिल सीनेट में आगे बढ़ गया है। मंगलवार को हुए प्रक्रियात्मक मतदान में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सांसदों ने विरोध किया। इसमें रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले कुछ बड़े देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस प्रस्तावित व्यवस्था की सबसे बड़ी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह बिल कानून नहीं बना है। US Russia Sanctions Bill में भारत क्यों आया निशाने पर? इस प्रस्ताव का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव डालना है। बिल अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों के सामान पर भारी टैरिफ लगाने की शक्ति देगा, जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। ताजा समझौते के मुताबिक, संभावित टैरिफ का दायरा रूसी कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों तक सीमित किया गया है। भारत और चीन इस सूची में महत्वपूर्ण देश माने जा रहे हैं। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूसी कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर अमेरिकी कानून के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नया दबाव बन सकता है। READ MORE: हैदराबाद के टॉप 10 AI स्टार्टअप्स 2026 भारत पहले से झेल रहा 50% टैरिफ का दबाव भारत पहले ही अमेरिकी टैरिफ को लेकर दबाव में है। आपके दिए विवरण के मुताबिक, अगस्त 2025 में अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने के बाद कुल अमेरिकी टैरिफ बोझ 50% तक पहुंच गया था। अब नया प्रतिबंध विधेयक सामने आने से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित कानून में राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध या टैरिफ से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। रूस से तेल खरीद पर क्या होगा असर? भारत के लिए रूसी तेल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए एक अहम विकल्प रहा है। अगर अमेरिका इस बिल को कानून का रूप देता है और भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है और कई उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिबंधों के समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस की ऊर्जा आय घटेगी और यूक्रेन युद्ध के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद पर दबाव पड़ेगा। READ MORE: सेंसेक्स