West Asia Conflict: अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पिछले डेढ़ साल से सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, जिसने दुनियाभर में तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के मुताबिक, इस हफ्ते एक गैलन पेट्रोल की औसत कीमत करीब 3.54 डॉलर हो गई है। यह एक महीने पहले के मुकाबले 21% ज्यादा है, जो कि काफी बड़ा उछाल है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने पेट्रोल को आसमान पर पहुंचा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के जहाज फंसे हैं और कच्चा तेल 100 डॉलर के पार चला गया।
क्यों बढ़े दाम?
इस महंगाई की जड़ है अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां। इस तनाव ने तेल बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है और व्यापारियों को डर सता रहा है कि तेल की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य बना असली संकट
दुनिया का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल मंगाता है। यह एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है। अभी यहां सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है, जिससे तेल के टैंकर सही से नहीं चल पा रहे। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमत एक वक्त 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, हालांकि बाद में यह 84 डॉलर के करीब आ गई है।
जानकारों का कहना है कि पेट्रोल के दाम जल्दी कम होने वाले नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि तेल कंपनियां अपना मुनाफा बनाए रखती हैं। ऊपर से गर्मियों में यात्रा बढ़ने और समर-ग्रेड फ्यूल के महंगे होने से आने वाले महीनों में भी राहत मिलना मुश्किल लग रहा है।
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भारत पर क्या असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में यह संकट भारत को भी महंगा पड़ सकता है। अभी पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और महंगाई पर काबू रखना मुश्किल हो जाएगा।
