TCS Nashik case: जानेमाने भारतीय आईटी कंपनी TCS के नासिक यूनिट से जुड़ा कथित धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामला अब कॉर्पोरेट कार्यसंस्कृति और सुरक्षा तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में कंपनी द्वारा आरोपी कर्मचारी निदा खान को निलंबित किए जाने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।
TCS नासिक केस में आरोपी निदा खान के सस्पेंशन के बाद कॉर्पोरेट वर्कप्लेस सेफ्टी और HR सिस्टम पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानिए कंपनी पर कितना पड़ेगा असर।
सस्पेंशन लेटर से क्या संकेत मिलते हैं
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 9 अप्रैल को जारी किए गए सस्पेंशन लेटर में कंपनी ने गंभीर मामला बताते हुए निदा खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया। पत्र में यह भी उल्लेख है कि खान फिलहाल न्यायिक या पुलिस हिरासत में हैं। जिसके चलते वे अपनी जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ हैं। साथ ही, उनका कंपनी नेटवर्क एक्सेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। उन्हें कंपनी से जुड़े सभी संसाधन वापस करने का निर्देश दिया गया है।
कंपनी की सख्ती और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
TCS ने इस मामले में स्पष्ट किया है कि वह कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है। कंपनी ने मामले से जुड़े अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया है। पुलिस जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। कंपनी का यह निर्णय कॉर्पोरेट जगत में एक मजबूत संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।
मामले की जड़ में क्या है विवाद
बता दें कि पूरे मामले की शुरुआत एक महिला कर्मचारी की शिकायत से हुई। जिसमें उसने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और बाद में धोखा देने का आरोप लगाया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से विवाहित था। पुलिस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि निदा खान ने कथित रूप से पीड़िता के धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया।
जांच बढ़ी तो सामने आए और आरोप
जांच प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे अन्य महिलाएं भी सामने आईं। कुल मिलाकर सात और महिलाओं ने मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इन शिकायतों में यह भी कहा गया कि कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने समय रहते उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की। ये घटनाएं फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की बताई जा रही हैं।
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गिरफ्तारियां और बढ़ती कानूनी पेचीदगियां
अब तक इस मामले में सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें एक महिला एचआर मैनजेर भी शामिल है। पुलिस पूरे नेटवर्क और आरोपों की गहराई से जांच कर रही है। वहीं, दूसरी ओर, निदा खान फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई हैं। उनके परिवार के अनुसार, वे मुंबई में हैं और गर्भवती हैं। उन्होंने नासिक की एक अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी किया है। जिसमें उनकी चिकित्सकीय स्थिति को प्रमुख आधार बनाया जा सकता है।
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जानिए बचाव पक्ष की दलीलें
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खान के वकील बाबा सैयद का कहना है कि उनके मुवक्किल पर गंभीर आरोप नहीं हैं। उन्होंने केवल बातचीत की थी। किसी अपराध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थीं। हालांकि, पुलिस और जांच एजेंसियां इस दावे की सत्यता की जांच कर रही हैं। इस मामले का अंतिम निष्कर्ष चाहे जो भी हो, लेकिन यह कॉर्पोरेट इंडिया के लिए एक चेतावनी जरूर बन चुका है।
