PeerDAS और ZK-EVM से Ethereum में बड़ा बदलाव

PeerDAS और ZK-EVM से Ethereum में बड़ा बदलाव

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January 6, 2026

Ethereum Upgrade: Ethereum के सह संस्थापक विटालिक ब्यूटिरिन ने X पर बताया कि Ethereum अब अपने विकास के ऐसे चरण में है, जहां बड़े बदलाव सिर्फ चर्चा तक सीमित नहीं रहे। उनके अनुसार दो अहम तकनीकी बदलाव अब वास्तविक रूप से लागू हो चुके हैं। पहला है PeerDAS का Ethereum मेननेट पर लाइव होना और दूसरा है ZK-EVM का प्रोडक्शन-लेवल पर पहुंचना, भले ही वे अभी शुरुआती अवस्था में हों।

विटालिक ने साफ किया कि यह बात सिर्फ नेटवर्क के तेज होने की नहीं है। असली बदलाव इस बात में है कि Ethereum अब डेटा को संभालने और ब्लॉक्स को वैलिडेट करने का तरीका बदल रहा है।

Ethereum में बड़े तकनीकी बदलाव अब थ्योरी नहीं रहे। विटालिक ब्यूटिरिन ने बताया कि PeerDAS और ZK-EVM कैसे नेटवर्क को तेज, सुरक्षित और डिसेंट्रलाइज्ड बना रहे हैं।

ब्लॉकचेन की पुरानी समस्या क्या थी

कई सालों से Blockchain को एक मुश्किल समझौता करना पड़ता था। नेटवर्क या तो डिसेंट्रलाइज्ड और सुरक्षित होता था, लेकिन धीमा रहता था या फिर तेज होता था मगर उसमें कम लोगों का नियंत्रण ज्यादा हो जाता था। विटालिक ने समझाया कि BitTorrent जैसे सिस्टम बड़े डेटा को डिसेंट्रलाइज्ड तरीके से भेज सकते थे, लेकिन उनमें साझा सहमति नहीं थी। दूसरी ओर Bitcoin ने डिसेंट्रलाइज्ड कंसेंसस तो दिया, लेकिन हर नोड को एक ही काम दोहराना पड़ता है, जिससे स्पीड सीमित रहती है।

उनके मुताबिक Ethereum अब इस पुराने समझौते से बाहर निकल रहा है। उन्होंने लिखा अब Ethereum, PeerDAS और ZK-EVMs के साथ डिसेंट्रलाइजेशन, कंसेंसस और हाई बैंडविड्थ तीनों एक साथ हासिल कर सकता है।

PeerDAS क्या बदलता है

PeerDAS Ethereum में डेटा जांचने का तरीका बदल देता है। पहले हर वैलिडेटर को ब्लॉक से जुड़ा पूरा डेटा डाउनलोड और स्टोर करना पड़ता था। अब PeerDAS के तहत वैलिडेटर केवल डेटा के छोटे-छोटे रैंडम हिस्से चेक करते हैं। अगर डेटा कहीं गायब होगा, तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगा। इससे Ethereum ज्यादा डेटा संभाल सकता है, बिना वैलिडेटर्स पर महंगे हार्डवेयर का दबाव डाले। सबसे अहम बात यह है कि PeerDAS पहले ही मेननेट पर लाइव हो चुका है।

ZK-EVMs से वैलिडेशन कैसे बदलेगा

ZK-EVM ब्लॉक्स की जांच को आसान बनाते हैं। आमतौर पर वैलिडेटर्स को हर ट्रांजैक्शन दोबारा चलाकर जांच करनी होती है। ZK-EVM में वैलिडेटर केवल एक क्रिप्टोग्राफिक प्रूफ चेक करता है, जिससे साबित होता है कि ब्लॉक सही है। इससे कंप्यूटिंग लोड कम होता है और भविष्य में गैस लिमिट बढ़ाना संभव हो जाता है। विटालिक के अनुसार, ZK-EVM अब स्पीड के लिहाज से इस्तेमाल लायक हैं। हालांकि, सुरक्षा को लेकर अभी और काम जरूरी है।

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ट्राइलेमा अब सिर्फ विचार नहीं

विटालिक ने कहा कि ब्लॉकचेन ट्राइलेमा अब सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं है। उनके शब्दों में ट्राइलेमा हल हो चुका है कागज पर नहीं, बल्कि लाइव कोड के साथ। डेटा अवेलेबिलिटी वाला हिस्सा पहले से चल रहा है और ZK-EVM परफॉर्मेंस के मामले में तैयार हैं।

Ethereum का आगे का रोडमैप

विटालिक के मुताबिक बदलाव एक साथ नहीं आएंगे। 2026 में Ethereum बिना ZK-EVMs के भी ऊंची गैस लिमिट सपोर्ट कर सकेगा। उसी समय कुछ लोग ZK-EVM नोड्स चला पाएंगे। 2026 से 2028 के बीच गैस प्राइसिंग, स्टेट स्टोरेज और एक्सीक्यूशन डेटा को ब्लॉब्स में ले जाने जैसे बदलाव होंगे। 2027 से 2030 के बीच ZK-EVM ब्लॉक वैलिडेशन का मुख्य तरीका बन सकते हैं।

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सेंट्रलाइजेशन पर चिंता

विटालिक ने ब्लॉक बिल्डिंग में बढ़ते सेंट्रलाइजेशन पर भी बात की। उनका लक्ष्य है कि भविष्य में पूरा ब्लॉक कभी एक ही जगह न बने, जिससे सेंसरशिप का खतरा कम हो और नेटवर्क ज्यादा निष्पक्ष बने। हालांकि, चुनौतियां बाकी हैं, लेकिन Ethereum अब इंतजार के दौर से बाहर आ चुका है। जिन विचारों पर करीब दस साल से काम हो रहा था वे अब जमीन पर उतर रहे हैं और Ethereum को बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार कर रहे हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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