Iran oil tankers blockade: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर वैश्विक चर्चा केंद्र में है। अमेरिका ने दावा किया कि उसका इस क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण है। उसने अपनी नाकेबंदी को बड़ी सफलता बताया है। वहीं, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू की। इसका मकसद था ईरान के व्यापार को पूरी तरह रोकना। खासकर तेल और युद्ध से जुड़ी सामग्री की आवाजाही रोकना। अमेरिका यह मानकर चल रही थी कि इससे ईरान की सप्लाई लाइन टूट जाएगी। लेकिन यह रणनीति पूरी तरह सफल होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 34 टैंकर नाकेबंदी पार, तेल व्यापार पर बड़ा सवाल। जानिए ईरान कैसे किया खेला।
टैंकरों की आवाजाही जारी
रिपोर्ट की मानें तो कम से कम 34 टैंकर blockade को पार करने में सफल रहे। इन जहाजों का संबंध ईरान से बताया गया है। कुछ जहाज खाड़ी से बाहर निकल गए। वहीं कई जहाज अरब सागर से ईरान की ओर बढ़े। जिसके बाद से अमेरिका के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। इन जहाजों में कई टैंकर कच्चा तेल लेकर जा रहे थे। अनुमान है कि करीब 1.07 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई हुई। इसकी कीमत 900 मिलियन डॉलर से ज्यादा आंकी जा रही है। यह रकम ईरान के लिए बड़ी आर्थिक राहत मानी जा रही है।
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नाकेबंदी से बचने के तरीके
बता दें कि नाकेबंदी से बचने के लिए जहाजों ने कई तरीके अपनाए। कुछ टैंकरों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए। इससे उनकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया। वहीं कुछ परिस्थितियों में समुद्र में जहाज से जहाज के बीच तेल ट्रांसफर भी किया गया। इससे तेल की असली पहचान छिपाई गई। दूसरी ओर ईरान पहले से ही यह दावा करती रही है कि हॉर्मुज़ पर उसका नियंत्रण है लेकिन उसने यह भी कहा है कि उनका नियंत्रण पहले जैसा ही है। अब इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अनुमति लेनी होगी। तय रूट का पालन करना अनिवार्य होगा।
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सुरक्षा को लेकर चिंता
इस पूरे मामले को जानने के बाद से समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बता दें कि कुछ दिन पहले भारतीय जहाजों सहित कई विदेशी जहाज पर फायरिंग की घटनाएं आई है। इससे क्षेत्र का माहौल और तनावपूर्ण हो गया है। जहाज मालिकों ने इसे डबल ब्लॉकेड की स्थिति बताया है। जानकारों का तो यह मानना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो तेल बाजार प्रभावित हो सकता है। अब सब यही चाहते हैं कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो ताकि पूर्व की भांति तेल का कारोबार पटरी पर लौट सके।
