Trump Post-Quantum Order 2031: क्या आने वाले कुछ सालों में मौजूदा इंटरनेट सुरक्षा पूरी तरह बेकार हो सकती है? इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अब बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनका मकसद देश को क्वांटम कंप्यूटिंग युग के लिए तैयार करना और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना है। ताजा आदेशों के तहत अमेरिकी सरकारी एजेंसियों को 2030 और 2031 तक अपनी एन्क्रिप्शन प्रणाली पूरी तरह बदलनी होगी। माना जा रहा है कि भविष्य के क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा सुरक्षा तकनीकों को मिनटों में तोड़ सकते हैं।
क्या क्वांटम कंप्यूटर भविष्य में मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ सकते हैं? अमेरिका के नए फैसलों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। समझें क्यों बढ़ गई है साइबर सुरक्षा की चिंता।
क्वांटम कंप्यूटर क्यों बन रहे हैं चिंता का कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटर पारंपरिक कंप्यूटरों से हजारों गुना अधिक शक्तिशाली होंगे। सबसे बड़ा खतरा ‘हार्वेस्ट नाउ, डिक्रिप्ट लेटर’ रणनीति से जुड़ा है। इसमें दुश्मन देश और साइबर जासूसी एजेंसियां अभी से एन्क्रिप्टेड डेटा इकट्ठा कर रही हैं। फिलहाल यह डेटा सुरक्षित है, लेकिन जैसे ही शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर उपलब्ध होंगे, यह सारी जानकारी आसानी से पढ़ी जा सकेगी। इसी खतरे को देखते हुए व्हाइट हाउस ने सभी संघीय एजेंसियों को नई पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी अपनाने का निर्देश दिया है।
2031 तक बदलनी होगी पूरी सुरक्षा व्यवस्था
ट्रंप प्रशासन के नए आदेश के मुताबिक, सरकार की प्रमुख डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों को 31 दिसंबर 2030 तक अपग्रेड करना होगा। इसके अलावा डिजिटल सिग्नेचर और प्रमाणीकरण से जुड़े सभी सिस्टम दिसंबर 2031 तक नए मानकों पर शिफ्ट किए जाएंगे। इसके लिए अमेरिकी वाणिज्य विभाग और NIST को अगले 180 दिनों के भीतर परीक्षण परियोजना शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मानना है कि अभी तैयारी नहीं की गई तो भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा नुकसान हो सकता है।
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क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री में भी बढ़ी हलचल
क्वांटम कंप्यूटर का असर सिर्फ सरकारी सिस्टम तक सीमित नहीं है। Bitcoin, Ethereum और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी भी इसी तरह की क्रिप्टोग्राफी पर आधारित हैं। Ethereum Foundation के शोधकर्ता जस्टिन ड्रेक के अनुसार 2030 तक क्वांटम कंप्यूटर द्वारा मौजूदा एन्क्रिप्शन तोड़ने की संभावना 10% तक पहुंच सकती है। वहीं 2032 तक यह जोखिम 50% तक बढ़ सकता है। हाल ही में Google Quantum AI ने दावा किया कि भविष्य के क्वांटम सिस्टम Bitcoin और Ethereum में इस्तेमाल होने वाली सुरक्षा तकनीक को कुछ ही मिनटों में तोड़ सकते हैं।
Bitcoin और Ethereum ने शुरू की तैयारी
- बढ़ते खतरे को देखते हुए कई ब्लॉकचेन नेटवर्क अपनी सुरक्षा व्यवस्था बदलने में जुट गए हैं।
- Ethereum नए पोस्ट-क्वांटम सिग्नेचर सिस्टम पर काम कर रहा है।
- Algorand ने 2027 तक क्वांटम-प्रतिरोधी नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रखा है।
- Ripple ने 2028 तक XRP Ledger को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की योजना पेश की है।
- Bitcoin के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने वॉलेट्स हैं, जिनमें अनुमानित 17 लाख से 23 लाख BTC अब भी पुराने सुरक्षा ढांचे पर निर्भर हैं।
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आगे क्या होगा?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्वांटम कंप्यूटिंग अब सिर्फ भविष्य की तकनीक नहीं रही। इसकी तैयारी अभी से शुरू करनी होगी। अमेरिका का यह फैसला दुनिया भर की सरकारों और टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। अगर क्वांटम कंप्यूटर उम्मीद के मुताबिक विकसित होते हैं, तो आने वाले वर्षों में इंटरनेट सुरक्षा, बैंकिंग और क्रिप्टोकरेंसी की पूरी दुनिया बदल सकती है।
