Indian Startup Ecosystem Funding: भारत का स्टार्टअप जगत आज 120 से अधिक यूनिकॉर्न, 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनियां और 390 बिलियन डॉलर की संयुक्त वैल्यूएशन के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप केंद्र बन चुका है। CII की रिपोर्ट बताती है कि इस असाधारण वृद्धि के पीछे देश का मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत सुधारों का बड़ा हाथ है। पिछले एक दशक में भारत ने न केवल निवेश बटोरा है, बल्कि तकनीक और नवाचार में भी दुनिया को पीछे छोड़ा है। रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्टार्टअप्स के नजरिए में आ रहा बदलाव है। अब स्टार्टअप्स केवल अपनी कंपनी की कीमत बढ़ाने के पीछे नहीं भाग रहे। मूल्य सृजन और मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं। अब जोर इस बात पर है कि बिजनेस मॉडल टिकाऊ हों, ऑपरेशनल अनुशासन बना रहे और इनोवेशन की जड़ें और गहरी हों।
भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब। 120 यूनिकॉर्न और 118 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ भारतीय स्टार्टअप्स अब मुनाफे और स्थायी विकास की ओर बढ़ रहे हैं।
ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को भी मजबूती
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी की मानें तो भारतीय स्टार्टअप अब फिनटेक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ड्रोन और डीप-टेक जैसे हाई-इम्पैक्ट सेक्टरों में कमाल के काम कर रहे हैं। ये क्षेत्र भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाने के साथ ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं। आने वाला दशक इन उभरते हुए क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व करने का है।
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फॉरवर्ड लुकिंग पॉलिसी इकोसिस्टम की आवश्यकता
जैसे-जैसे स्टार्टअप्स का विस्तार हो रहा है। उनके सामने नियामक और परिचालन संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत को अब ऐसी नीतियों की जरूरत है जो तकनीक की रफ्तार के साथ कदम मिला सकें। सीआईआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन का मानना है कि भारत के पास टैलेंट और गति दोनों है। बस अब फॉरवर्ड लुकिंग पॉलिसी इकोसिस्टम की आवश्यकता है।
भारतीय स्टार्टअप यात्रा फंड जुटाना नहीं, वास्तविक परिणाम देना है। इसमें मुनाफा कमाना, कार्यकुशलता बढ़ाना, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना और वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ जमाना शामिल है।
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