Indian Airlines News: केंद्र सरकार ने विमान ईंधन यानी ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतों को लेकर नया ढांचा लागू किया है, जिसके तहत घरेलू एयरलाइंस के लिए ईंधन दरों में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि सरकार का दावा है कि यह कदम यात्रियों पर बोझ बढ़ाने के बजाय भविष्य में बड़े झटकों से बचाने के लिए उठाया गया है।
क्या आने वाले दिनों में फ्लाइट टिकट महंगे होंगे? ATF की बढ़ी कीमत, 10,000 करोड़ रुपये के फंड और यात्रियों पर पड़ने वाले असर को समझिए।
ATF कीमत बढ़ी, लेकिन बाजार भाव से अब भी सस्ता
नई व्यवस्था के तहत एयरलाइंस चाहें तो अगले तीन साल तक ATF की तय कीमत पर ईंधन खरीद सकती हैं। इसके लिए उन्हें अब 115 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि पहले प्रभावी दर करीब 104.93 रुपये प्रति लीटर थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमत फिलहाल करीब 142 रुपये प्रति लीटर चल रही है। ऐसे में सरकार का कहना है कि नई दरें अभी भी बाजार कीमत से काफी कम हैं। इस योजना में शामिल होना एयरलाइंस के लिए पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है। जो कंपनियां इसमें नहीं आएंगी, उन्हें बाजार आधारित कीमतों पर ही ईंधन खरीदना होगा।
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ा दबाव
पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर दिया है। इसका सीधा असर विमानन उद्योग पर पड़ा है। जानकारों के मुताबिक, संकट से पहले ATF की कीमत करीब 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी सामान्य हालात में करीब 40% रहती है, जबकि अस्थिर बाजार में यह 60% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइंस को कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन खर्च और बढ़ गया है।
10,000 करोड़ रुपये का फंड कैसे करेगा मदद?
कैबिनेट ने हाल ही में 10,000 करोड़ रुपये के ATF प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को मंजूरी दी है। इस फंड का मकसद एयरलाइंस को सीधे पैसा देना नहीं, बल्कि तेल कंपनियों को राहत पहुंचाना है। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें तय सीमा से ऊपर जाएंगी, तब सरकार तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ब्याज-मुक्त सहायता देगी। कीमतें सामान्य होने पर यह राशि वापस सरकारी खजाने में लौटाई जाएगी।
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क्या यात्रियों को महंगा टिकट खरीदना पड़ेगा?
फिलहाल एयरलाइंस की ईंधन लागत जरूर बढ़ी है, क्योंकि कीमत 105 रुपये से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इससे कंपनियों के खर्च पर कुछ दबाव आएगा, लेकिन अगर सरकार यह कदम नहीं उठाती तो एयरलाइंस को करीब 142 रुपये प्रति लीटर की दर से ईंधन खरीदना पड़ सकता था। ऐसे में टिकट कीमतों में कहीं ज्यादा तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिल सकती थी। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस फैसले को ‘कम नुकसान वाला विकल्प’ मान रहे हैं।
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यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा किराए में स्थिरता के रूप में दिख सकता है। अब एयरलाइंस को भविष्य के ईंधन खर्च का बेहतर अंदाजा रहेगा। इससे अचानक और बार-बार किराया बढ़ाने की संभावना कम हो सकती है। अगर वैश्विक हालात और खराब नहीं होते, तो आने वाले महीनों में यात्रियों को टिकट कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव से राहत मिल सकती है।
ATF की कीमत बढ़ी है, इसलिए एयरलाइंस का खर्च भी बढ़ेगा। लेकिन सरकार का मानना है कि यह कदम भविष्य में और बड़े किराया झटकों को रोक सकता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि एयरलाइंस इस योजना को कितना अपनाती हैं और इसका असर टिकट कीमतों पर कितना पड़ता है।
