Rupee vs Dollar: भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही रुपया 33 पैसे की कमजोरी के साथ 96.86 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले ही रुपया 96.53 प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। लगातार 7 ट्रेडिंग सत्रों से रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे यह इस साल एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं की सबसे कमजोर मुद्रा बन गई है।
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। समझिए इसकी बड़ी वजहें, विदेशी निवेश, तेल कीमतों और आम जिंदगी पर असर की पूरी जानकारी।
2026 में 7 फीसदी से ज्यादा टूटा रुपया
2026 की शुरुआत से अब तक रुपया 7 फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है। सिर्फ इस हफ्ते में ही इसमें करीब 0.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि वैश्विक और घरेलू दोनों इस कमजोरी को बढ़ा रहे हैं।
आखिर रोज क्यों गिर रहा है रुपया?
रुपये में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम वजह कच्चे तेल ( Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है और इसका भुगतान अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व (Middle East Tenson) में बढ़ते तनाव ने भी तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। भू-राजनीतिक तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ रहा है।
READ MORE: Play Store और App Store ऐप्स पर Delhi HC सख्त
विदेशी निवेशकों की निकासी भी बनी वजह
एक और बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से पैसा निकालना है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय शेयर (Indian Stocks) और बॉन्ड बेच रहे हैं। जब विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया और कमजोर हो जाता है।
इसी बीच अमेरिकी डॉलर भी दुनिया भर में मजबूत हुआ है। आर्थिक अनिश्चितता के समय निवेशक अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश मानते हैं इसलिए डॉलर की मांग बढ़ती है। इसका असर भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दिखाई देता है।
READ MORE: Petrol-Diesel हुआ महंगा, शेयर बाजार ने फिर मारी बाजी
आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा?
रुपये की कमजोरी सिर्फ बाजार या निवेशकों की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ता है। कमजोर रुपया आयात यानी विदेश से आने वाले सामान को महंगा बना देता है। इसमें पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई रोजमर्रा की चीजें शामिल हैं।
भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है इसलिए रुपये में गिरावट आगे चलकर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती है। ईंधन महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट खर्च भी बढ़ता है, जिससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपया लगातार कमजोर होता रहा, तो भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है और महंगाई को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विदेशी यात्रा, विदेश में पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय खरीदारी भी भारतीय परिवारों के लिए ज्यादा महंगी हो जाएगी।
