यात्रियों के खर्च का हिसाब अब AI संभालेगा, जानें कैसे

यात्रियों के खर्च का हिसाब अब AI संभालेगा, जानें कैसे

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August 10, 2026

Agentic AI: अब AI एजेंट रसीद पढ़ने से लेकर खर्च को सही अकाउंट में डालने, कंपनी की नीति जांचने और हिसाब मिलाने तक का काम संभाल रहे हैं। कॉरपोरेट कंपनियों में खर्च का हिसाब लंबे समय से मैनुअल प्रक्रिया पर टिका था। कर्मचारी रसीद ढूंढते थे, GL कोड डालते थे और बाद में वित्त टीम खर्च की जांच करती थी। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, AI अब इस पूरे काम को लेन-देन के समय ही नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

AI Expense Management से कंपनियों में खर्चों का हिसाब आसान, जानें कैसे AI रसीद, ऑडिट, धोखाधड़ी और खर्च की जांच संभाल रहा है।

AI Expense Management में कितना बदलाव आया?

Navan के एक लेख में Skift और Navan की 2026 State of Corporate Travel and Expense Report के आंकड़े दिए गए हैं। इसके मुताबिक, 29% ट्रैवल और एक्सपेंस मैनेजर अभी भी खर्चों को मैनुअली प्रोसेस करते हैं। वहीं, 71% यात्रियों को एक खर्च रिपोर्ट तैयार करने में 30 मिनट या उससे ज्यादा समय लगता है। AI इस प्रक्रिया को बाद में रिफंड देने के बजाय खर्च होने के समय ही नियंत्रित करने का तरीका अपना रहा है।

Navan के अनुसार, AI अब रसीद प्रोसेसिंग, GL कोडिंग, रियल-टाइम पॉलिसी जांच, धोखाधड़ी पकड़ने और हिसाब मिलाने जैसे काम कर सकता है। इसके अलावा अनुपालन, VAT वापसी और खर्च का अनुमान लगाने में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है।

AI Expense Management से ऑडिट भी बदला

पारंपरिक ऑडिट में आमतौर पर लेन-देन के एक हिस्से की जांच की जाती है। AI एजेंट इसके बजाय 100% सबमिशन को रियल टाइम में स्कैन कर सकते हैं। इसमें नकली रसीद, एक ही खर्च की दो बार एंट्री और कंपनी की नीति के खिलाफ खर्च पकड़े जा सकते हैं। Ramp के एक लेख के मुताबिक, 50,000 कंपनियों के डेटा में एजेंट इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में आउट-ऑफ-पॉलिसी खर्च की घटनाएं दो साल में 62% घटीं। पॉलिसी फ्लैग की दर भी 60% कम हुई। Ramp का Policy Agent हर लेन-देन की जांच 99% सटीकता के साथ करने का दावा करता है। कंपनी के मुताबिक, गलत खर्च को भुगतान के समय ही रोका जा सकता है और हर फैसले का रिकॉर्ड भी तैयार होता है।

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कर्मचारियों और वित्त टीम को कितना फायदा?

2025 की Forrester TEI स्टडी का हवाला देते हुए Navan ने बताया कि उसके इस्तेमाल से कर्मचारियों ने हर खर्च सबमिशन पर 24 मिनट बचाए। वहीं, वित्त टीम का ऑडिट और हिसाब मिलाने में लगने वाला समय 40% कम हुआ। यह बदलाव सिर्फ समय बचाने तक सीमित नहीं है। AI एजेंट खर्च की जांच पहले ही कर सकते हैं। यानी वित्त टीम को पैसा खर्च होने के कई हफ्ते बाद गलती खोजने के बजाय उसी समय कार्रवाई का मौका मिलता है।

भविष्य में AI एजेंट खुद यात्रा बुक करने या सॉफ्टवेयर का नवीनीकरण करने जैसे काम भी कर सकते हैं। इसके लिए Visa Intelligent Commerce जैसे सिस्टम एक बार इस्तेमाल होने वाले टोकन उपलब्ध कराते हैं। Ramp भी Visa साझेदारी के जरिए सीमित दायरे वाले वर्चुअल कार्ड पर काम कर रहा है।

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मिड-साइज कंपनियां भी अपना रही AI

American Express Trendex के 513 वित्तीय निर्णय लेने वालों के सर्वे में 52% ने बताया कि वे खर्च प्रबंधन के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे आम इस्तेमाल धोखाधड़ी पकड़ने, खर्च को श्रेणी में डालने और रसीद का डेटा लेने में हो रहा है। वहीं 40% इसे अपनाने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में 66% कारोबारियों ने खर्च की बढ़ती जटिलता को चुनौती बताया। 88% ने कहा कि उन्हें ऐसा टूल चाहिए जो कंपनी की बदलती नीतियों के साथ खुद को ढाल सके।

सर्वे के मुताबिक, आधी कंपनियों के पास दो साल पहले की तुलना में ज्यादा विक्रेता हैं। वहीं 41% कंपनियां 2026 में अपनी खर्च नीतियां बदल चुकी हैं। वजहों में बढ़ता खर्च, कम गलतियां और बेहतर नियंत्रण शामिल हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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