Uber AI spending: आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस काफी तेजगति से हर क्षेत्र पर कब्जा जमाते जा रहा है। दुनियां इनकी क्षमताओ को देख काफी चर्चांएं कर रहे हैं। टेक कंपनियां लंबे समय से एआई को भविष्य बता रही है। दावा किया जा रहा है कि एआ कोडिंग को काफी आसान बना देगा। काम का रफ्तार बढ़ेगा, कंपनी का खर्च कम होगा। ऐसा लगता है मानो एआई के बिना आगे का जिन्दगी अधूरा है। लेकिन अब तस्वीर बदलती हुई दिख रही है। एआई से काम तो तेज हो रहा है लेकिन खर्च की रफ्तार भी काफी तेजी से बढ़ रहा है। कई कंपनियों को खर्च के अनुरूप सफलता मिलता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
टेक कंपनियों में एआई का बढ़ता इस्तेमाल अब साबित हो रहा ह, Microsoft, Uber और Anthropic की रणनीतियों ने एआई इंडस्ट्री की उजागर की सच्चाई।
Uber का एआई बजट तेजी से खत्म
एआई की बहती लहर में Uber ने भी भारी-भरकम निवेश करना शुरू कर दिया। लेकिन कंपनी को अब बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स की माने तो कंपनी का 2026 का पूरा बजट अप्रैल तक खत्म हो गया है। इसके पीछे का कारण एंथ्रोपिक का Claude Code माना जा रहा है। कहा यह जा रहा है कि हजारों इंजीनियर इस टूल का इस्तेमाल करने लगे थे। जिसके कारण एआई का उपयोग काफी बढ़ गया। जिसका कंपनी ने कभी सोचा भी नही था। और बजट खत्म हो गया।
माइक्रोसॉफ्ट ने भी बदली रणनीति
उबर के बाद अब Microsoft भी इसी रास्ते पर दिख रही है। रिपोर्ट्स की माने तो कंपनी अपने कई क्लाउड लाइसेंस को बंद करने जा रही है। बता दें कि जून के आखिरी में माइक्रोसॉफ्ट का वित्तिय वर्ष समाप्त होने जा रही है। इसलिए कंपनी चाहती है कि अगले फाइनेंसियल ईयर में खर्च पर कंट्रोल किया जाए। इतना ही नहीं एआई टूल्स की लागत भी अब समीक्षा के दायरे में आ गई है। पहले माइक्रोसॉफ्ट ने हजारों इंजीनियर को एआई का उपयोग करने के लिए कहा था। लेकिन अब कपनी अपने इन को GitHub Copilot CLI की तरफ ले जा रही है। जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि कंपनी बाहरी एआई टूल्स पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है।
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AI की असली लागत आई सामने
भलेही एआई का उपयोग करने वालो को यह काफी सुविधाजनक लगता हो लेकिन इन सुविधाओं को देने के लिए कंपनी को भारी कीमत लगानी होती है। यानी एआई मुफ्त या सस्ता नहीं है। हर चैटिंग से लेकर हर कोड जनरेशन पर पैसे खर्च हो रहे हैं। इतना ही नहीं, इनसब के पीछे भारी कंप्यूटिंग पॉवर भी काम करता है उसपे भी काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। यानी जितनी कंपनियां एआई का उपयोग करती है उतनी ही उसे बिल भरना पड़ता है।
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फायदे के साथ बढ़ रहा नया खर्च
ऐसा नहीं है कि इसके फायदे नहीं है। यह फायदाकारी तो है लेकिन खर्चीला भी है। जिसे कंपनी ने खर्चे कम करने के लिए बनाए थे। वहीं, अब अधिक खर्चीले साबित हो रहे हैं। यानी कंपनी का दांव अब उल्टा पड़ने लगा है। जिसके बाद से कंपनी के एआई बिजनेस मॉडल पर भी सवाल उठने लगे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि माइक्रोसॉफ्ट अपने एआई चिप्स एंथ्रोपिक को देने पर बातचीत कर रही है।
