India 1071 Crore Cybercrime Crypto Network

करोड़ों साइबर फ्रॉड का खुलासा, क्रिप्टो नेटवर्क ने मचाई हलचल

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August 18, 2026

Digital Arrest Scam: गुजरात पुलिस के मुताबिक, असम के 25 वर्षीय रफीकुल आलम की गिरफ्तारी के बाद ऐसे ही बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस का दावा है कि वह डिजिटल अरेस्ट से जुटाए गए पैसे को क्रिप्टो में बदलकर चीनी आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचाता था।

गुजरात पुलिस की जांच में डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क सामने आया, आरोपी से 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले और 1,090 मामलों से कनेक्शन मिला।

डिजिटल अरेस्ट से शुरू हुई जांच

मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति से शुरू हुआ। ठगों ने वीडियो कॉल पर उसे डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के नाम वाले फर्जी दस्तावेज दिखाए और पैसे की मांग की। जांच के दौरान साइबर अधिकारियों को ऐसे करीब 10 और पीड़ित मिले। ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह के डिजिटल अरेस्ट में फंसे थे।

पुलिस टीमों ने समय रहते उनके घर पहुंचकर पैसे ट्रांसफर होने से रोके। इसके बाद बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू हुई। इसी कड़ी में जांचकर्ताओं की पहुंच असम के बारपेटा जिले तक पहुंची। गुजरात पुलिस के मुताबिक, आलम को तीन दिन की निगरानी और अंडरकवर जांच के बाद सोमवार को पकड़ा गया। उसके घर से कई तकनीकी उपकरण भी बरामद किए गए।

एक घंटे में 1,754 बैंक खातों में पैसा

पुलिस के अनुसार, आलम का काम सिर्फ पैसा लेना नहीं था। डिजिटल अरेस्ट के शिकार लोगों से भारतीय बैंक खातों में रकम आने के बाद वह उसे कई खातों में बांटता था। इसके बाद रकम को छोटे हिस्सों में तोड़कर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। फिर यह पैसा कथित तौर पर चीनी आपराधिक नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचाया जाता था। जांच में एक लेन-देन खास तौर पर सामने आया। पुलिस का कहना है कि एक ही रकम को एक घंटे में 1,754 भारतीय बैंक खातों में बांटा गया। यानी करीब 30 खाते प्रति मिनट की रफ्तार से लेन-देन हुआ।

आलम के मोबाइल से करीब 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले। इनमें लगभग 16 करोड़ के लेन-देन का पता चला है। पुलिस ने यह भी कहा कि Chip Seller ऐप और ऑनलाइन गेमिंग खातों का इस्तेमाल पैसे के रास्ते के तौर पर किया गया।

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WhatsApp और Telegram से विदेशी नेटवर्क से संपर्क

पुलिस का आरोप है कि आलम WhatsApp और Telegram के जरिए चीनी नेटवर्क के संपर्क में था। बातचीत में वॉलेट की जानकारी, स्कैनर, यूजर आईडी, पासवर्ड और अपराध करने के तरीके साझा किए जाते थे। इससे जांचकर्ताओं को शक है कि वह केवल बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाला छोटा एजेंट नहीं था। पुलिस के मुताबिक, वह कथित विदेशी नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। इसी जांच में अहमदाबाद, सूरत और जामनगर में कई लोगों को समय रहते बचाया गया।

अहमदाबाद में एक बुजुर्ग को बच्चे से जुड़े अश्लील सामग्री के मामले में फंसाने की धमकी दी गई। ठगों ने उससे 20 लाख मांगे थे। सूरत में एक बुजुर्ग से पहले 60 लाख मांगे गए। बाद में वह 40 लाख देने को तैयार हो गया। उसने दुकान बेचकर 20 लाख तक जुटा लिए थे। पुलिस ने समय पर पहुंचकर रकम ट्रांसफर होने से रोक दी। जामनगर में निवेश के नाम पर ठगी की जा रही थी। पीड़ित ने पहले 9.50 लाख भेज दिए थे और 10 लाख और भेजने वाला था। साइबर टीम ने समय रहते उसे रोक लिया।

भारत में बढ़ रहा डिजिटल अरेस्ट का खतरा

आलम की गिरफ्तारी को पुलिस डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो आधारित साइबर अपराध के बड़े मामलों की कड़ी मान रही है। हाल के मामलों में ठगी की रकम भारतीय खातों से होकर क्रिप्टो में बदलने और विदेश भेजने का पैटर्न सामने आया है। गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सिर्फ डिजिटल अरेस्ट घोटालों से भारतीयों को करीब 3,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 2025 में 24 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें बताई गई ठगी की रकम करीब 22,495 करोड़ थी।

फरवरी 2026 में केंद्र के PRAHAAR ढांचे ने भी आपराधिक नेटवर्क द्वारा क्रिप्टो वॉलेट के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई थी। इसके बाद Multi-Agency Centre के तहत डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी जांच के लिए अलग टास्क फोर्स बनाई गई।

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ठगी हो तो तुरंत करें शिकायत

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस, CBI, ED या सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फोन करके गिरफ्तारी का डर दिखाना और पैसे मांगना ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में घबराकर पैसे न भेजें। तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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