Crypto Fraud India: क्या क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर लोगों को ठगने वाले बड़े नेटवर्क देश में सक्रिय हैं? दिल्ली हाई कोर्ट के एक ताजा फैसले ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। अदालत ने ₹1 करोड़ के क्रिप्टो फ्रॉड मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट का मानना है कि मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक संगठित साइबर अपराध गिरोह से जुड़ा हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में क्रिप्टो से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 करोड़ USDT क्रिप्टो फ्रॉड मामले में जमानत ठुकराई, कोर्ट बोला डिजिटल वॉलेट ट्रेस के लिए कस्टडी ज़रूरी।
कैसे हुआ 1 करोड़ का क्रिप्टो फ्रॉड?
पुलिस के अनुसार, आरोपी गौरव ने साल 2024 की शुरुआत में एक साझा परिचित के जरिए शिकायतकर्ता से संपर्क बनाया। धीरे-धीरे उसने भरोसा जीता और ऊंचे मुनाफे का लालच देकर निवेश के लिए तैयार किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि पीड़ित ने आरोपी के डिजिटल वॉलेट में 111,247 USDT ट्रांसफर किए, जिनकी कीमत करीब 1 करोड़ थी। जांच में सामने आया कि रकम मिलने के तुरंत बाद आरोपी ने अपना कमीशन निकाल लिया और बाकी 104,526 USDT कई अलग-अलग वॉलेट्स में भेज दिए। पुलिस का कहना है कि ये वॉलेट अन्य संदिग्ध लोगों से जुड़े हो सकते हैं।
कोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दावा किया कि वह केवल एक मध्यस्थ था और जांच में सहयोग कर रहा है। लेकिन अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि अब तक की जांच एक बड़े और संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की ओर इशारा करती है। कोर्ट ने यह भी माना कि अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल किया। अदालत के अनुसार, धन की रिकवरी और पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आरोपी से आगे पूछताछ जरूरी है।
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देश में तेजी से बढ़ रहे क्रिप्टो अपराध
यह मामला कोई अकेली घटना नहीं है। हाल के महीनों में दिल्ली और अन्य राज्यों में कई बड़े क्रिप्टो फ्रॉड सामने आए हैं।
कुछ प्रमुख मामले
- अप्रैल में 74 लाख की क्रिप्टो मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
- नकली पुलिस अधिकारी बनकर USDT डील में ठगी करने वाले 4 आरोपी गिरफ्तार
- 5 करोड़ की क्रिप्टो ट्रेल कई राज्यों तक पहुंची
- जांच में दुबई से जुड़े नेटवर्क की भी जानकारी मिली
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित गुप्ता कहते हैं, क्रिप्टो तकनीक खुद समस्या नहीं है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कई बार पैसा कुछ मिनटों में कई देशों के वॉलेट्स तक पहुंच जाता है।
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अब आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट फिलहाल पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों की कोशिश उन डिजिटल वॉलेट्स का पता लगाने की है जहां कथित तौर पर रकम ट्रांसफर की गई। इस मामले से साफ है कि क्रिप्टोकरेंसी का बाजार जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उससे जुड़े अपराध भी उतनी ही तेजी से नए रूप ले रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच से कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
