RBI AI risk India: भारत में तेजी से डिजिटल हो रहे बैंकिंग सिस्टम के बीच एक नया खतरा उभर रहा है। एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इन्हीं में से एक है Claude Mythos जिसने नियामकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बढ़ती चिंता को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत शुरू की है। इसी सिलसिले में अमेरिका के फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसे संस्थानों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। इन सभी देशों से बात करने का एक ही उद्देश्य है संभावित साइबर खतरों को समझना और उनसे निपटने के उपाय तैयार करना।
डेटा सुरक्षा और साइबर अटैक के खतरे के बीच RBI ने AI के उपयोग पर सख्त नियम बनाने की तैयारी शुरू की। जानिए क्यों इसकी पड़ रही है जरूरत?
साइबर हमलों का खतरा
शुरूआता आंकलन में यह सामने आया है कि यह एआई सिस्टम कमजोरियों को तेजी से खोज सकता है। इससे हैकर्स को फायदा मिल सकता है। बैंकिंग सॉफ्टवेयर में मौजूद खामियों का तेजी से दुरुपयोग होने की आशंका जताई जा रही है। इससे लाखों ग्राहकों के डेटा और पैसों पर जोखिम बढ़ सकता है। भारत का डिजिटल भुगतान सिस्टम पहले ही काफी बड़ा हो चुका है। National Payments Corporation of India द्वारा संचालित Unified Payments Interface हर महीने लाखों करोड़ रुपये के लेनदेन को संभालता है। ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक का असर व्यापक हो सकता है।
दुनिया भर में बढ़ी चिंता
भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश इस खतरे को बड़ी गंभीरता से ले रहे हैं। जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के नियामक भी बैंकों की तैयारी का आंकलन कर रहे हैं। विश्वस्तर पर इस एआई मॉडल को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है। इस बीच जानकारी मिल रही है कि RBI, Anthropic से सीधे संपर्क करने की भी योजना बना सकता है। हालांकि, इस AI मॉडल तक पहुंच आसान नहीं है। इसलिए अभी चुनिंदा अमेरिकी संस्थानों तक ही सीमित रखा गया है।
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NPCI की रणनीति
भारतीय एजेंसियां इस तकनीक को समझने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रही हैं। एनपीसीआई कुछ बैंकों के साथ मिलकर संभावित कमजोरियों की पहचान करना चाहता है। खासकर जीरो-डे खामियों को पहले ही पकड़ने की कोशिश की जा रही है। लेकिन यहां एक बड़ी बाधा भी है। भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियम इस तरह के परीक्षण को सीमित करते हैं। विदेशी सर्वर पर भारतीय ग्राहकों के डेटा का उपयोग करना नियमों के खिलाफ हो सकता है। इससे परीक्षण प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है।
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सीमित एक्सेस की चुनौती
फिलहाल RBI विदेशी संस्थानों से जानकारी साझा कर स्थिति को समझने की कोशिश कर रहा है। नियमों को और सख्त बनाने की तैयारी में है। बैंकों के लिए नई गाइडलाइंस बनाई जा रही हैं। इनमें डेटा सुरक्षा और अनुपालन को प्राथमिकता दी जाएगी। आने वाले समय में एआई और बैंकिंग का यह तालमेल नई चुनौतियां और समाधान दोनों लेकर आ सकता है।
