AI Hallucination: कुछ साल पहले तक ‘बिक्सोनिमेनिया’ नाम की बीमारी के बारे में किसी ने नहीं सुना था, लेकिन 2024 में कुछ वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन एक स्टडी डालकर दावा किया है कि यह बीमारी कंप्यूटर इस्तेमाल करने से आंखों को प्रभावित करती है। बाद में सामने आया है कि यह पूरी कहानी फर्जी थी। न सिर्फ रिसर्च, बल्कि वैज्ञानिकों के नाम, उनकी यूनिवर्सिटी और फंडिंग तक सब कुछ बनाया गया था। सबसे हैरानी की बात यह रही कि ChatGPT और Gemini जैसे AI टूल्स ने भी इसे सच मान लिया। इस तरह एक झूठी बीमारी भी असली जैसी लगने लगी।
क्या आप हर जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं? जानिए कैसे AI और डिजिटल दुनिया में फर्जी खबरें सच जैसी लगने लगी हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।
क्यों बढ़ रहा है गलत जानकारी का खतरा?
आज के समय में गलत जानकारी फैलाना बहुत आसान हो गया है। चाहे वह AI की गलती हो, किसी देश की गलत जानकारी फैलाने की कोशिश हो या रोजमर्रा के झूठ हो। लोग अक्सर इन पर भरोसा कर लेते हैं। इसका कारण हमारी आदत है कि हम दूसरों की बातों पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं और खुद जांच करने की कोशिश कम करते हैं।
‘The Traitors’ जैसा असली प्रयोग
इस बात को समझाने के लिए The Traitors जैसा एक प्रयोग किया गया। इसमें चार लोगों ने अपनी-अपनी रिसर्च पेश की। कुछ सच बोल रहे थे और कुछ झूठ। दर्शकों को पहचानना था कि कौन झूठ बोल रहा है।
लोग कैसे धोखा खा जाते हैं?
इस प्रयोग में पाया गया कि लोग अक्सर बातों की सच्चाई से ज्यादा बाहरी चीजों पर ध्यान देते हैं। जैसे बोलने का तरीका, कपड़े, लहजा या पर्सनल कहानी। दिलचस्प बात यह रही कि जो लोग सच बोल रहे थे, उन्हें ही ज्यादा शक की नजर से देखा गया। एक रिसर्चर का काम इतना अच्छा था कि लोगों को लगा ‘यह सच नहीं हो सकता।’ वहीं, जो लोग झूठ बोल रहे थे, वे ज्यादा भरोसेमंद लगे क्योंकि उनकी बातों में आत्मविश्वास और व्यक्तिगत अनुभव जुड़ा हुआ था।
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आज के दौर में क्या बदल गया है?
गलत जानकारी पहले भी होती थी, लेकिन अब इसकी रफ्तार बहुत तेज हो गई है। AI और इंटरनेट के कारण झूठ जल्दी फैलता है और असली जैसा दिखता है। आज शिक्षा में गणित और विज्ञान पर ज्यादा जोर दिया जाता है, लेकिन सोचने और सवाल करने की आदत पर कम ध्यान दिया जाता है। जबकि सच और झूठ पहचानने के लिए यही सबसे जरूरी है।
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हमें क्या करना चाहिए?
AI, इंटरनेट और मीडिया हमारे लिए सिर्फ टूल हैं। इन्हें समझदारी से इस्तेमाल करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें हर जानकारी को बिना सोचे समझे सही नहीं मानना चाहिए। अगर हम थोड़ा सावधान रहें और खुद सोचें, तो हम आसानी से सही और गलत में फर्क कर सकते हैं।
