Proton Mail ban case: भारत में डिजिटल प्राइवेसी और Cyber Security बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस मामले में कई कंपनियां कोर्ट में अपनी हाजिरी दे चुकी है। ईमेल सेवा Proton Mail भी अपने कुछ मामलों को लेकर कोर्ट की शरण में है। लेकिन कंपनी और उनके यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर आई है। Karnataka High Court ने Proton Mail को ब्लॉक करने के आदेश पर रोक लगाई, कहा – इस स्टेज पर पूरी तरह से बंद करना सही नहीं। इस तरह कोर्ट ने फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध के आदेश पर रोक लगा दी है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने Proton Mail को दी बड़ी राहत कहा- बिना पूरी सुनवाई के प्लेटफॉर्म ब्लॉक करना सही कदम नहीं। जानिए डिटेल्स में।
Anonymity वाली सुविधाओं पर विवाद
बता दें कि यह आदेश चीफ जस्टिस विभू भाखरू और जस्टिस CM पूनाचा की डिवीज़न बेंच ने दिया। कोर्ट शुक्रवार को एक सिंगल-जज बेंच द्वारा पहले जारी किए गए निर्देश के खिलाफ Proton Mail द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था। उस पिछले आदेश में प्लेटफ़ॉर्म की गुमनामी anonymity वाली सुविधाओं को लेकर चिंता जताई गई थी। कोर्ट रिपोर्ट की माने तो ने उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी सुविधाओं के कारण, कुछ स्थितियों में, अधिकारियों के लिए गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल यूज़र्स का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। यही वजह था उनपर रोक लगा दी गई थी।
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अश्लील और आपत्तिजनक मेल भेजने का है मामला
यह मामला M Moser Design Associates India ने दायर किया था। जिसमें कंपनी ने कहा था कि हमारे कुछ कर्मचारियों को Proton Mail द्वारा अश्लील और आपत्तिजनक मेल भेजे गए हैं। कंपनी ने अपनी याचिका में प्रतिष्ठा धूमिल होने की बात कही है। Proton Mail ने अपना पक्ष रखते हुए सभी वैध कानूनी अनुरोधों का पालन करता है। कंपनी ने कहा कि डेटा या एक्सेस से जुड़े निर्देशों का जवाब देने से पहले वह जरूरी प्रक्रिया का पालन करता है। पहले जो नोटिस भेजा गया था वो न्यायिक आदेश के तहत नहीं था। बाद में जब स्विस अधिकारियों जरिए नोटिस प्राप्त हुआ तो उसका पालन किया गया है। जिसपर कोर्ट ने कहा कि कंपनी अपनी जिम्मेदारी पल्ला नहीं झाड़ रही है। कोर्ट केंद्र सरकार से भी जबाव मांगा है।
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फिलहाल, इस मामले में कंपनी जिम्मेदारी और कोर्ट के आदेशों का पालन करती हुई दिख रही है। लेकिन अभी भी कानूनी लड़ाई जारी है। भारत में Proton Mail पहले की तरह ही मौजूद रहेगी।
