First VPN crackdown: साइबर अपराध की दुनियां में वर्षों से सक्रीय का जाना- पहचाना नाम VPN पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसयों ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने First VPN सेवा को बंद कर दिया है। इस कार्रवाई में एक कथित एडनिमिस्ट्रेटर को भी गिरप्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई को एजेंसी ने कहा है कि यह प्लेटफॉर्म कई रैनसमवेयर गैंग और हैंकिंग समूह के लिए लाइनर का काम करते हुए सुरक्षित मार्ग दे रहा था।
First VPN साइबर क्राइम नेटवर्क पर कार्रवाई में बड़ा खुलासा, एबीआई और Europol ने सर्वर बंद कर एडमिन को गिरफ्तार किया। जानिए पूरी खबर विस्तार से।
अपराधियों के लिए बना था ‘गुप्त इंटरनेट रास्ता’
एजेंसी के मुताबिक, यह प्लेटफार्म पिछले 10 सालों से साइबर अपराध की दुनियां में सक्रिय था। यह दुनियां भर के देशों में मौजूद सर्वरों घुसकर यूजर्स की वास्तविक पहचान को छुपाने में सहायता करती थी। डेटा चोरी करना, नेटवर्क मे घुसकर फ्रॉड करना इसका धंधा था। इसके खतरनाक इरादे का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि, अब तक इसमें 25 से अधिक रैनसमवेयर गिरोह इसके साथ जुड़कर कई घटनाओं को अंजाम दे चुके थे।
डार्क वेब पर खुलेआम हो रहा था प्रचार
इस फ्लेफॉर्म का उपयोग बड़े ही शातिराने तरीके से की जाती थी। यह रूसी भाषावाले डार्क वेब फोरम्स पर प्रचारित की जाती थी। वो इस फोरम का इस्तेमाल इसलिए किया करता था कि यूजर्स पूरी तरह सुरक्षित और कानून की नजरों से दूर रहेंगे। इन्हीं कारणों से कई हैकिंग समूह इसके जुड़े। यह अपराधियों के लिए अवैध कारोबार का माध्यम बन गया था।
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FBI ने जारी की चेतावनी
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चेतावनी जारी किया। एजेंसी ने तकनीक संकेत, संदिग्ध IP एड्रेस, हमले के तरीके और सुरक्षा सुझाव की जानकारी साझा किए हैं। एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो इस नेटवर्क का उपयोग नेटवर्क हैंकिंग डीओएस अटैक में किए गए थे। इस बड़े संयुक्त अभियान में 33 सर्वर बंद किए और कई सारे डोमेन भी जब्त कर लिए गए।
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506 यूजर्स की जानकारी एजेंसियों के पास
इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी को अलग-अलग देशों के 506 यूजर्स की जानकारी भी मिली है। जिसे संबंधित देशों के एजेंसियों से साझा किया गया है। साइबर सुरक्षा कंपनी Bitdefender, जिसने इस ऑपरेशन में सहयोग किया। उसका कहना है कि पकड़े गए यूजर्स की सूची तो एक बानगी है। जैसै- जैसे जांच आगे बढ़ेगी सारे नेटवर्क के चिठ्ठे परत-दर परत खुलते जाएंगे और कई सारे नाम का खुलासा होते जाएंगे।
हालांकि, ऐसी सेवाओं के बंद होने से साइबर अपराध पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। लेकिन इससे साइबर अपराधियों में खौफ जरूर बना रहेगा। यह संदेश मिल गया है कि डिजिटल दुनिया में भी पूरी तरह सुरक्षित छिपना आसान नहीं है।
