Perplexity Comet Browser: इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब कीबोर्ड और माउस पर निर्भरता कम होती दिख रही है। जरा सोचिए, अगर आप बोलें और वेबसाइट खुल जाए और बोलें तो पेज अपने आप स्क्रॉल हो जाए। तो आपको कैसा लगेगा। जी हां, यही बदलाव लेकर आया है Perplexity का Comet ब्राउज़र। अब ब्राउज़िंग टाइपिंग से नहीं, आवाज़ से होगी। कमांड दीजिए। लिंक खुल जाएगा। यह कोई वॉयस सर्च नहीं है। फुल वॉयस कंट्रोल है। तो आइए जानते हैं इस फीचर के बारे में विस्तार से।
AI ब्राउज़िंग का नया दौर शुरू, Perplexity ने पेश किया फुल वॉयस कंट्रोल ब्राउज़र…क्या-क्या करेगा काम…जानिए यूजर्स के लिए कितना है फायदेमंद।
डेस्कटॉप पर लाइव, मोबाइल पर जल्द
अगर आप डेस्कटॉप यूजर्स है तो यह आपके लिए है। क्योंकि कंपनी यह सुविधा सिर्फ डेस्कटॉप यूज़र्स के लिए उपलब्ध कराया है। iOS यूजर्स के लिए भी जल्द रोलआउट किए जाने की बात कही जा रही है। एक आसान शॉर्टकट से वॉयस मोड चालू किया जा सकता है। फिर वेबसाइट खोलने, स्क्रॉल करने, लिंक फॉलो करने या पेज का सारांश निकालने जैसे काम केवल बोलकर किए जा सकते हैं।
रियल-टाइम AI की ताकत
Comet का वॉयस सिस्टम के बारे में बताया जा रहा है कि यह OpenAI के gpt-realtime-1.5 मॉडल पर आधारित है। कंपनी के CEO Aravind Srinivas के अनुसार, यह तकनीक कम लेटेंसी और बेहतर सटीकता प्रदान करती है। जिससे वॉयस कमांड ज्यादा विश्वसनीय तरीके से काम करती हैं।
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वॉयस ही बनेगा मुख्य इंटरफेस
जहां अधिकतर ब्राउज़र वॉयस को एक अतिरिक्त फीचर मानते हैं, वहीं Comet इसे मुख्य इंटरफेस बनाना चाहता है। यूज़र एक ही निर्देश में कई काम कर सकते हैं। इस पेज की तुलना दूसरी टैब से करो। इससे ब्राउज़िंग अनुभव अधिक नेचुरस और आकर्षक बनता है।
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गोपनीयता पर अलग राह
Comet का दावा है कि जहां संभव हो वॉयस प्रोसेसिंग लोकल डिवाइस पर होती है। डिफॉल्ट रूप से क्लिक हिस्ट्री क्लाउड में स्टोर नहीं की जाती। साथ ही, ब्राउज़िंग के आधार पर विज्ञापन प्रोफाइल तैयार नहीं किए जाते। जिससे यूज़र की प्राइवेसी को प्राथमिकता मिलती है।
भविष्य AI असिस्टेंट की ओर
अगर ऐसा होना शुरू हो गया और यूजर्स को पसंद आने लगा तो आने वाले समय में Comet Assistant यूज़र की पसंद को समझकर शॉपिंग, फूड ऑर्डर और फ्लाइट सर्च जैसे कार्यों में मदद करता हुआ दिखाई दे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
