Social Media Reel Addiction: क्या आपका बच्चा रोज घंटों Reels या छोटे वीडियो देखता है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। Short Videos Study में सामने आया है कि लंबे समय तक छोटे वीडियो देखने की आदत बच्चों और किशोरों की याददाश्त, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ बेयरुथ के शोधकर्ताओं ने इस बारे में नई चेतावनी दी है।
Reels और शॉर्ट वीडियो देखने की बढ़ती आदत को लेकर सामने आई नई रिसर्च, जानिए एक्सपर्ट्स ने स्वास्थ्य को लेकर क्या सलाह दी है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
यह अध्ययन European Child & Adolescent Psychiatry जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने 2015 से 2025 के बीच हुई 42 अंतरराष्ट्रीय स्टडी का विश्लेषण किया। इसमें 1,500 से अधिक समूहों और करीब 47,000 प्रतिभागियों के आंकड़े शामिल थे। इनकी औसत उम्र 16.8 वर्ष थी। रिसर्च के मुताबिक, छोटे वीडियो प्लेटफॉर्म का तेजी से बदलने वाला कंटेंट दिमाग को लगातार नई जानकारी देता रहता है। इससे धीरे-धीरे ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और जानकारी को याद रखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्यों लग जाती है छोटे वीडियो की लत?
शोध में तीन बड़े कारण बताए गए हैं।
- तेजी से बदलने वाला कंटेंट
- बिना रुके चलने वाली Infinite Scrolling
- हर यूजर के हिसाब से तैयार होने वाली Personalised Feed
इन वजहों से लोग लंबे समय तक स्क्रीन पर बने रहते हैं। शोधकर्ताओं ने EEG और MRI जैसे परीक्षणों के जरिए भी दिमाग की गतिविधियों का अध्ययन किया।
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मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है असर
अध्ययन के अनुसार, जो किशोर रोज 4 घंटे या उससे ज्यादा समय छोटे वीडियो देखते हैं, उनमें ध्यान भटकने, जल्दबाजी में फैसले लेने, कमजोर वर्किंग मेमोरी, तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं अपेक्षाकृत अधिक देखी गईं। इसके अलावा डिजिटल लत का जोखिम भी बढ़ा पाया गया। शोधकर्ताओं ने ‘अनियंत्रित इस्तेमाल’ का मतलब ऐसी स्क्रीन आदत बताया है, जो नींद, पढ़ाई और रोजमर्रा की दिनचर्या को प्रभावित करने लगे।
एक्सपर्ट्स ने क्या दी सलाह?
रिसर्च टीम का कहना है कि बच्चों और किशोरों के लिए स्क्रीन टाइम तय करना जरूरी है। परिवार और स्कूल मिलकर स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करें। नियमित समय सीमा, ऑफलाइन गतिविधियां और सामाजिक जुड़ाव बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहतर साबित हो सकते हैं।
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यह अध्ययन बताता है कि छोटे वीडियो पूरी तरह नुकसानदायक नहीं हैं, लेकिन उनका जरूरत से ज्यादा और बिना नियंत्रण के इस्तेमाल चिंता की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित स्क्रीन टाइम और सही डिजिटल आदतें बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।
