Supreme Court India: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अदालतों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस सवाल पर बड़ा फैसला सुनाते हुए Essel Infraprojects मामले में NCLT और NCLAT के आदेश रद्द कर दिए। कोर्ट ने पाया कि फैसले में AI द्वारा तैयार किए गए फर्जी कानूनी उदाहरणों (Hallucinated Precedents) का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने इसे गंभीर चूक बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में बिना जांचे AI पर भरोसा करना ‘विनाशकारी’ साबित हो सकता है।
Essel Infraprojects मामले में SC का बड़ा फैसला, कोर्ट ने कहा कि बिना सत्यापन AI पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है और न्यायिक फैसलों में इंसानी विवेक सबसे जरूरी है।
क्या है Essel Infraprojects मामला?
यह मामला Essel Infraprojects की निलंबित निदेशक पूजा रमेश सिंह की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने NCLT के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी को दिवाला समाधान प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process) में भेजा गया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर बैंक की याचिका पर हुई थी। बैंक ने दावा किया था कि 200 करोड़ की क्रेडिट सुविधा से जुड़े मामले में कंपनी की ओर से दिए गए कॉर्पोरेट गारंटी के तहत 87.43 करोड़ का भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद 28 अगस्त 2024 को NCLT ने दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया, जिसे 11 सितंबर 2025 को NCLAT ने भी बरकरार रखा।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किए आदेश?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि NCLT ने अपने फैसले में ऐसे कानूनी उदाहरणों का हवाला दिया, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं थे। ये उदाहरण AI द्वारा तैयार किए गए ‘हैलुसिनेटेड’ यानी फर्जी संदर्भ थे। कोर्ट ने साफ कहा कि AI केवल सहायक उपकरण हो सकता है, लेकिन वह इंसानी निर्णय का विकल्प नहीं बन सकता। अदालत ने यह भी कहा कि न्याय देने की पूरी जिम्मेदारी इंसानों के हाथ में ही रहनी चाहिए।
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वकीलों और जजों को दी सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी वकील की जिम्मेदारी है कि वह AI से मिली जानकारी की पूरी जांच करे। बिना सत्यापन के AI से तैयार सामग्री अदालत में पेश करना पेशेवर आचरण के खिलाफ माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई न्यायाधीश बिना जांचे ऐसे फर्जी संदर्भों पर भरोसा करता है, तो यह भी गंभीर चूक है। इसी के साथ अदालत ने बार काउंसिल को निर्देश दिया कि वह AI के इस्तेमाल को लेकर एक समिति बनाए और न्यायिक प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करे।
क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT के दोनों आदेश रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में AI का उपयोग सावधानी से होगा और अंतिम फैसला हमेशा तथ्यों तथा मानवीय विवेक के आधार पर ही लिया जाएगा।
