फेड गवर्नर का दावा, Stablecoin बढ़ते तो ब्याज दरें हो सकती हैं कम

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November 10, 2025

US Interest Rates: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर स्टीफन मिरान ने कहा है कि डॉलर-बैक्ड स्टेबलकॉइन्स की बढ़ती मांग भविष्य में अमेरिकी ब्याज दरों को प्रभावित कर सकती है। यह बयान उन्होंने BCVC Summit 2025 में हार्वर्ड क्लब न्यूयॉर्क में 7 नवंबर को दिया।

जानें कैसे डॉलर-बैक्ड स्टेबलकॉइन्स अमेरिका की ब्याज दरों और वैश्विक वित्तीय सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं।

मिरान ने बताया कि Stablecoins के बढ़ते वैश्विक उपयोग से अमेरिकी ट्रेजरी की मांग बढ़ सकती है, जिससे उधारी की लागत कम हो सकती है। उन्होंने इसे न्यूट्रल रेट से जोड़ा जो लंबी अवधि की मौद्रिक नीति तय करने में मदद करता है। उन्होंने चेताया कि अगर यह प्रवृत्ति इसी तरह बढ़ती रही, तो Stablecoins ‘सेंट्रल बैंकर्स’ के लिए ट्रिलियन डॉलर का हाथी बन सकते हैं।

Stablecoins क्या हैं और कैसे काम करते हैं

Stablecoins डिजिटल टोकन होते हैं जो किसी विशेष एसेट जैसे अमेरिकी डॉलर, से जुड़े होते हैं। ये टोकन अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को आसान और सस्ता बनाते हैं। इस साल GENIUS Act पास होने के बाद, अमेरिकी Stablecoins जारी करने वालों को पूरी तरह सुरक्षित और तरल डॉलर एसेट में रिजर्व रखना होगा। इससे उनकी विश्वसनीयता बढ़ती है और इन्हें मुख्यधारा के वित्तीय सिस्टम में आसानी से जोड़ा जा सकता है।

Stablecoins से आसान डॉलर एक्सेस

मिरान ने बताया कि Stablecoins उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लोगों को डॉलर तक आसानी से पहुंचने में मदद करते हैं। कई देशों में वित्तीय सिस्टम भरोसेमंद नहीं हैं या कैपिटल कंट्रोल्स हैं। ऐसे में Stablecoins ब्लॉकचेन नेटवर्क पर काम करते हैं, जो पारंपरिक बैंकिंग बाधाओं के बिना सीमा पार लेन-देन की सुविधा देते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इन टोकन्स की मांग अमेरिका से अधिकतर विदेशों से आ सकती है। अमेरिका में लोग पहले से ही बीमित जमा और यील्ड देने वाले एसेट्स तक पहुंच रखते हैं, लेकिन कई देशों में यह संभव नहीं। Stablecoins डॉलर में बचत और लेन-देन का नया विकल्प प्रदान करते हैं।

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न्यूट्रल रेट और ट्रेजरी की मांग पर असर

Stablecoins जारी करने वाली कंपनियां आम तौर पर अपने रिजर्व ट्रेजरी, रेपो, या सरकारी मनी मार्केट फंड्स में रखेंगी। इसका मतलब है कि इन एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। मिरान ने इसे 2000 के दशक की ग्लोबल सेविंग ग्लट से तुलना की, जब विदेशी पूंजी अमेरिका में निवेश के लिए आई और लंबी अवधि की ब्याज दरें कम हुईं।

फेड के शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2030 तक Stablecoins 1 ट्रिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकते हैं। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि इससे ब्याज दरें 0.40% तक कम हो सकती हैं। इसका मतलब है कि फेड को भविष्य में ब्याज दर तय करने के तरीके पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

वर्तमान Stablecoins मार्केट

DefiLlama के अनुसार, वर्तमान में Stablecoins मार्केट लगभग 305.2 बिलियन डॉलर का है। पिछले सप्ताह थोड़ी गिरावट आई, लेकिन लंबी अवधि की वृद्धि जारी है। Tether कुल सप्लाई का लगभग 60% नियंत्रित करता है।

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Stablecoins 2020–21 के क्रिप्टो बूम में तेजी से बढ़े, 2022 में थोड़ी गिरावट आई, और 2023 के मध्य से पुनः वृद्धि शुरू हुई। आज ये सिर्फ क्रिप्टो ट्रेंड नहीं रहे, बल्कि वैश्विक लेन-देन और वित्तीय सिस्टम को प्रभावित करने लगे हैं। जैसे-जैसे दुनिया भर में लोग डॉलर-बैक्ड Stablecoins का उपयोग बढ़ाते हैं, अमेरिका को भविष्य में ब्याज दरों और मौद्रिक नीति पर नए फैसले लेने पड़ सकते हैं। Stablecoins अब सिर्फ डिजिटल क्रिप्टो टोकन नहीं रहे, बल्कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बदलाव लाने वाले महत्वपूर्ण एसेट बन गए हैं।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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