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FraudGPT क्या है? कर सकता है ये 5 खतरनाक काम

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March 20, 2025

FraudGPT, ChatGPT की तरह ही एक शक्तिशाली AI चैटबॉट है। इसका यूज मालिसियस कोड, घोटाले के पत्र लिखने के लिए किया जा सकता है।

FraudGPT : AI ने जहां हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, वहीं इसके खतरनाक पहलू भी सामने आ रहे हैं। ChatGPT जैसी टेक्नोलॉजी ने भले ही लोगों को जानकारी तक आसान पहुंच दी है, लेकिन इसी AI का एक डरावना रूप भी है, जिसका नाम है FraudGPT। FraudGPT एक जनरेटिव AI चैटबॉट है, जिसे खासतौर पर साइबर अपराध के लिए यूज किया जा रहा है। एक पॉडकास्ट में बताया गया है कि यह AI किस हद तक खतरनाक साबित हो सकता है। इसका यूज गलत सूचना फैलाने, Deepfake बनाने और ऑनलाइन फ्रॉड करने में किया जा रहा है।

FraudGPT कैसे कर रहा है साइबर अपराध आसान?

  • फिशिंग अटैक: यह चैटबॉट बेहद असली दिखने वाले फिशिंग ईमेल तैयार कर सकता है, जिससे लोग आसानी से धोखा खा सकते हैं।
  • ऑनलाइन फ्रॉड: FraudGPT के जरिए फर्जी वेबसाइट और इनवॉइस तैयार करना आसान हो जाता है, जिससे ऑनलाइन ठगी के मामले बढ़ सकते हैं।
  • डीपफेक स्कैम: AI की मदद से रियलिस्टिक डीपफेक वीडियोज और ऑडियोज बनाए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल पहचान चोरी और ब्लैकमेलिंग में किया जा सकता है।
  • फर्जी पहचान निर्माण: नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल और फेक आईडी बनाकर लोगों को गुमराह करने का काम भी इससे किया जा सकता है।
  • बैंकिंग फ्रॉड: ऑनलाइन बैंकिंग डिटेल्स चुराने और अवैध लेनदेन में भी इस तरह के AI टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है।

चुनावी हेरफेर में AI का खतरनाक इस्तेमाल

AI का इस्तेमाल अब सिर्फ पर्सनल फ्रॉड तक नहीं रह गया है, बल्कि FraudGPT जैसे AI टूल्स को चुनावी हेरफेर में भी हथियार बनाया जा रहा है। इसके जरिए फर्जी न्यूज, प्रोपेगैंडा को प्रभावित करने जैसे काम किए जा सकते हैं। इसके जरिए फेक न्यूज आर्टिकल, सोशल मीडिया ट्रोलिंग, नकली बयान और स्पीच, ऑटोमेटेड कॉल्स और फर्जी सर्वे बनाए जा सकते हैं।

AI हैकिंग टूल्स का खतरा

FraudGPT सिर्फ एक फेक न्यूज जनरेटर ही नहीं है, बल्कि इसे हैकिंग टूल के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। FraudGPT को डार्क वेब पर हैकिंग टूल के रूप में भी बेचा जा रहा है। इसके अलावा FraudGPT की सदस्यता तक बेचा जा रहा है। इतना ही नहीं अपराधी इसका यूज कर के साइबर अटैक कर रहे हैं।

AI बनाम AI

जहां FraudGPT जैसे टूल्स साइबर क्राइम को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं AI खुद इस खतरे से निपटने में बड़ा रोल निभा रहा है। साइबर सिक्योरिटी कंपनियां अब AI-पावर्ड टूल्स का इस्तेमाल करके FraudGPT जैसी टेक्नोलॉजी को मात दे रही है, लेकिन ये चैटबॉट भी समय के साथ-साथ काफी एडवांस हो रहे हैं। वहीं, AI के जरिए AI-Generated फेक ईमेल और वेबसाइट्स की पहचान कर सकते हैं।

साइबर क्राइम थ्रिलर

अगर कोई साइबर क्रिमिनल FraudGPT का इस्तेमाल करके एक परफेक्ट मर्डर की साजिश करता है, जहां हर चीज AI से डिजाइन की गई होती है। AI से फर्जी पहचान और खुद को छुपाना और डार्क वेब से हथियार और टूल्स खरीदने की AI स्ट्रेटेजी मिल सकती है। इतना ही नहीं, FraudGPT से ही CCTV और डिजिटल ट्रेस मिटाने की प्लानिंग भी की जा सकती है।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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