ChatGPT से निजी बातें करने का डर खत्म? Signal वालों ने बनाया जबरदस्त सीक्रेट AI

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January 21, 2026

Confer secure AI chatbot:  आज के तकनीक के युग में AI chatbot तेज़ी से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। लेकिन यह भी डर लगा रहता है कि कहीं हमारी निजी बातें रिकॉर्ड, स्टोर या लीक तो न हो जाए। कई यूज़र इस आशंका के चलते Artificial Intelligence से खुलकर बात नहीं कर पाते। अब यह समस्या दूर होनेवाली है। Signal के संस्थापक Moxie Marlinspike ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना है। उन्होंने Confer नाम का AI चैटबॉट लॉन्च किया है। तो आइए जानते हैं कि यह चैट प्राइवेसी को किस तरह से सुरक्षित रख सकते हैं।

अब AI चैट होगी पूरी तरह सीक्रेट…Confer कैसे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से बदल रहा है प्राइवेसी का स्वरूप…चिंतामुक्त होकर कर सकते हैं निजी बातें…जानिए कैसे है संभव?

Confer की पहली प्राथमिकता प्राइवेसी

मॉक्सी का कहना है कि Confer नाम का यह AI चैटबॉट की बुनियाद ही प्राइवेसी पर रखी गई है। यह ऐसा AI असिस्टेंट होने का दावा करता है, जहां बातचीत सिर्फ यूज़र और AI के बीच रहती है। बीच में कोई तीसरा नहीं होता। न कंपनी, न सर्वर एडमिन और न ही कोई बाहरी एजेंसी आपकी चैट तक पहुंच सकती है।

कंपनी भी नहीं देख सकती आपका डेटा

Confer की सबसे अलग बात यह है कि इसमें बातचीत एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहती है। साथ ही यह ट्रस्टेड एग्जीक्यूशन एनवायरमेंट TEE पर चलता है। यानी डेटा प्रोसेसिंग भी ऐसे सुरक्षित माहौल में होती है। जिसे बाहर से झांकना भी नामुमकिन है।

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बिना ईमेल और पासवर्ड वाला AI अनुभव

आज जहां हर प्लेटफॉर्म ईमेल, मोबाइल नंबर और पासवर्ड मांगता है। वहीं Confer में लॉगिन PassKey के जरिए होता है।  जिसकी कॉपी सर्वर पर मौजूद नहीं रहती। इसका मतलब यह कि आपकी पहचान और बातचीत को जोड़कर देखने का कोई रास्ता ही नहीं बचता। आपका डेटा बिल्कुल सुरक्षित रहेगा।

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ओपन-सोर्स होने से बढ़ता है भरोसा

Confer का पूरा कोड Open Source रखा गया है। कोई भी टेक एक्सपर्ट यह जांच सकता है कि सिस्टम कैसे काम करता है। कहीं छुपकर डेटा तो नहीं लिया जा रहा। यह पारदर्शिता उन यूज़र्स के लिए खास मायने रखती है, जो बड़े टेक प्लेटफॉर्म्स पर ब्लैक बॉक्स सिस्टम से असहज महसूस करते हैं।

क्यों अलग हैं बड़े AI प्लेटफॉर्म्स

बता दें कि Google, OpenAI या Microsoft जैसे बड़े AI प्लेटफॉर्म एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं देते। इसके पीछे कानूनी जिम्मेदारियां, बिजनेस मॉडल और डेटा प्रोसेसिंग की सीमाएं हैं। लेकिन Confer जैसे प्रयोग यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या आनेवाले समय में AI और प्राइवेसी साथ-साथ चल सकते हैं?

बदल सकता है AI इंडस्ट्री का रुख

वहीं, टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Confer जैसे प्राइवेसी फर्स्ट AI मॉडल लोकप्रिय होते हैं, तो बड़े टेक खिलाड़ियों पर भी दबाव बढ़ेगा। हो सकता है आने वाले समय में यूज़र ही पूरी गोपनीयता की गारंटी भी मांगने लगें।

Rahul Ray

मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव। हिन्द पोस्ट हिन्दी मैगज़ीन, ईटीवी भारत और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य करते हुए प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय भूमिका निभाई है। दिल्ली और बिहार के विभिन्न जिलों में न्यूज़ रिपोर्टिंग, ग्राउंड स्टोरीज़, कंटेंट प्लानिंग, कॉपी एडिटिंग एवं कंटेंट एडिटिंग से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक संभालने का अनुभव है। मैंने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार से डिग्री प्राप्त की है। पाठक केंद्रित कंटेंट तैयार करना मेरी कार्यशैली में शामिल रही है।

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