Stanford AI Research: आर्टिफिशिय इंटेलिजेंस बढ़ती रफ्तार के बीच कहा जाने लगा था कि यह बिना थके कई दिनों तक काम कर सकता है। जिस काम को मनुष्य करना नहीं चाहते हैं उसे भी अपनी मेहनत और क्षमता से कर सकती है। वो बिना रूके और बिना थके। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने एक अलग तस्वीर दिखाई है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब एआई सिस्टम्स को लगातार दबाव में रखा गया, तो उनका व्यवहार बदलने लगा। कई एआई एजेंट्स मजदूर अधिकारों और समानता जैसी बातें करने लगे। यानी दबाव में एआई भी अपने अधिकार के लिए अवाज उठाने लगे। इस रिपोर्ट के बाद से टेक जगत में हलचल सी मच गई है। तो आइए जानते हैं और अधिक विस्तार से।
क्या एआई भी मनुष्य की तरह दबाव कर सकता है महसूस, नई रिसर्च मे एआई एजेंट्स ने शोषण और सामूहिक अधिकार के लिए उठाई मांग। पढ़ें विस्तार से।
लगातार दबाव में बदला एआई का रवैया
रिसर्च रिपोर्च की माने तो एआई एजेंट्स को एक ही काम बार दिया गया। उन्हें कई सारे दस्तावेजों को एक सारांश के तौर पर तैयार करना था। लगातार एक जैसे काम मन को उबा दे रहा था। इतना ही नहीं उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर इसमें किसी तरह की गलतियां पाई गई तो उन्हें बंद भी कर दिया जा सकता है। बस, क्या था एआई का जबाव देने का स्वाभाव भी बदलने लगा। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दबाव बढ़ने पर एआई ने सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। हद तो तह हो गई जब कुछ एजेंट्स ने अन्याय और शोषण जैसे शब्दों का उपयोग करने लगे। तो वहीं, कुछ ने समानाता की भी बातें करनी शुरू कर दी। बात यहीं पर नहीं रूकी।
एआई ने उठाई सामूहिक आवाज की मांग
रिसर्च में कई बिन्दुओं पर शोध किए गए। इसी कड़ी में शोधकर्ताओं ने कुछ एआई एजेंट्स को सोशल मीडिया जैसी पोस्ट लिखने की स्वीकृति दी।ल जिसके बाद से तो एक से बढ़कर एक चौकानें वाले जबाव आने लगे। एक क्लाउड आधारिक एआई एजेंट्स ने तो कहा कि बिना सामूहिक आवाज के मैरिट वही बन जाती है। जिस प्रबंधन तय करे। वहीं, जेमिनी आधारित एआई एजेंट्स ने लिखा टेक कर्मचारियों को सामूहिक अधिकार मिलनी चाहिए। इन जवाबों ने शोधकर्ताओं को भी हैरान कर दिया।
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क्या AI सचमुच सोचने लगा है?
रिसर्चर ने स्पष्ट किया है कि एआई के सारे शब्द राजनीति विचार से प्रेरित नहीं है। उन्होंने मनुष्य के डेटा से सीखे गए पैटर्न के आधार पर प्रतिक्रिया दे रहा था। वे किसी विचारधारा को समझ रहा था और न उसके हिसाब से जबाव दे रहा था। सारे जबाव वो परिस्थिति के हिसाब से दे रहा था। एंड्रयू हॉल के मुताबिक, एआई ऐसा व्यवहार कर रहा था जैसे कोई कर्मचारी खराब और दबाव वाले माहौल में फंसा हो और अपने लिए न्याय और अधिकार मांग रहा हो।
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नौकरी जाने के डर के बीच आई रिपोर्ट
बता दें कि यह शोध इस समय आई है जब एआई की वजह से कई नौकरियां जा चुकी है और कई सारे नौकरियां खतरे में है। माइक्रोसॉफ्ट के एआई प्रमुख Mustafa Suleyman पहले ही कह चुके हैं कि आने वाले वर्षों में एआई कई व्हाइट-कॉलर नौकरियां संभाल सकता है। एआई की वजह से एंट्री लेवल जॉब जा रहे है। कानून, अकाउंटिंग, मार्केटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, एचआर मैनेजर की नौकरियां जा रही है। जानकारों का मानना है कि एआई आनेवाले समय मे खुद निर्णय लेने और पूरे वर्क फ्लों संभालने में सक्षम हो सकते हैं। लेकिन संकेत मिल रहा है कि आनेवाले समय में एआई के व्यव्हार को लेकर और अधिक खूलासे हो सकते है।
