AI Cybersecurity Digital Bharat Resilience

AI के दौर में साइबर सुरक्षा से बदलेंगे कारोबार के नए नियम

11 mins read
6 views
August 24, 2026

AI Cybersecurity: क्या AI कारोबार को तेज कर सकता है, बिना साइबर जोखिम बढ़ाए? अभी यही सवाल भारतीय कंपनियों के सामने सबसे अहम है। एक कार्यक्रम के पहले एपिसोड में देश के प्रमुख CIO और CISO ने AI, क्लाउड और साइबर सुरक्षा पर चर्चा की। बेंगलुरु में हुई इस चर्चा में HCLTech, Angel One, Mphasis, Zensar Technologies और Fortinet के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि AI अब केवल प्रयोग की तकनीक नहीं है। यह तेजी से कारोबार की रणनीति का हिस्सा बन रहा है।

AI और Claude के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा क्यों जरूरी है? जानिए विशेषज्ञों की राय।

AI अब तकनीक नहीं, कारोबार की रणनीति

Rishi Mehta ने कहा कि AI का इस्तेमाल अब प्रयोग से आगे बढ़कर कारोबारी कामकाज और फैसलों तक पहुंच गया है। वहीं Hemanth Kumar ने AI को डेटा के इस्तेमाल को आसान बनाने वाली तकनीक बताया। Greesh Verma Jairath के मुताबिक, AI अब अलग कंप्यूटिंग वातावरण तक सीमित नहीं है। कंपनियां इसे अपनी मुख्य रणनीति में शामिल कर रही हैं। Zensar Technologies के Suresh Devrangadi ने AI से जुड़े प्रयासों के लिए स्पीड, क्वालिटी और एफिशिएंसी को अहम बताया। उनका कहना था कि तकनीकी पहल का असर सीधे कारोबार के नतीजों में दिखना चाहिए। Fortinet के Vishak Raman ने AI को एक बड़ा बदलाव बताया। उनके मुताबिक कंपनियों को अब AI को लेकर इंतजार करने के बजाय साइबर सुरक्षा को नए तरीके से तैयार करना होगा।

Trusted AI के लिए सुरक्षा जरूरी

AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ कंपनियों के सामने एक नया सवाल है। AI को सुरक्षित तरीके से बड़े स्तर पर कैसे अपनाया जाए? Rishi Mehta ने ‘Security for AI’ और ‘AI for Security’ दोनों पर जोर दिया। AI बड़ी मात्रा में सुरक्षा डेटा का विश्लेषण कर सकता है। इससे संदिग्ध गतिविधियों और असामान्य पैटर्न को जल्दी पहचानने में मदद मिल सकती है। Angel One के Hemanth Kumar ने भरोसे के लिए सुरक्षा, उपलब्धता और मजबूती को जरूरी बताया। वित्तीय सेवाओं में छोटी सी तकनीकी परेशानी भी ग्राहकों पर बड़ा असर डाल सकती है। इसी वजह से साइबर सुरक्षा को बाद में जोड़ने के बजाय सिस्टम तैयार करते समय ही शामिल करना जरूरी है।

READ MORE: Ripple का बड़ा कदम, RLUSD फंड से XRP की रफ्तार तेज

क्लाउड और पुराने सिस्टम की जटिलता बड़ी चुनौती

आज कंपनियां कई क्लाउड प्लेटफॉर्म, पुराने सिस्टम और अपने सर्वर पर चलने वाले ढांचे का इस्तेमाल करती हैं। इससे डेटा और सुरक्षा को संभालना मुश्किल हो जाता है। Greesh Verma Jairath ने कहा कि सुरक्षा की शुरुआत सही जानकारी से होती है। कंपनियों को पहले यह पता होना चाहिए कि उनका डेटा कहां मौजूद है। उन्होंने चेतावनी दी कि AI को केवल POC यानी शुरुआती प्रयोग तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। कारोबार की जरूरत और सुरक्षा को शुरुआत से ही साथ लेकर चलना होगा। Rishi Mehta ने भी जरूरत से ज्यादा सुरक्षा टूल इस्तेमाल करने के बजाय डेटा, पहचान, पहुंच और नेटवर्क की निगरानी जैसे बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देने की बात कही।

साइबर डिफेंस से आगे बढ़कर Cyber Resilience

आज कंपनियां यह मानकर नहीं चल सकतीं कि हर साइबर हमला रोका जा सकेगा। इसलिए अब ध्यान हमले को रोकने के साथ-साथ उसके बाद कारोबार को जल्द सामान्य करने पर भी है। Rishi Mehta ने कहा कि हर कंपनी को अपने सबसे जरूरी डिजिटल संसाधनों की पहचान करनी चाहिए। साथ ही नियमित रूप से अपनी प्रतिक्रिया और रिकवरी योजना की जांच करनी चाहिए। Hemanth Kumar ने साइबर रेजिलिएंस को बिजनेस कंटिन्यूटी से जोड़ा। वहीं Greesh Verma Jairath ने साफ डेटा, रिकवरी टेम्पलेट और परीक्षण वाले वातावरण को जरूरी बताया। Suresh Devrangadi ने लॉगिंग, ऑडिट, ट्रेसिंग और निगरानी को अहम बताया। Vishak Raman ने कहा कि साइबर सुरक्षा सिर्फ तकनीकी टीम की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें कारोबार, कानूनी टीम, संचार और नियामकीय पक्ष भी शामिल हैं।

READ MORE: Upbit ने इस Altcoin को किया लिस्ट, जानें कीमत और नियम

AI युग में बदल रही टेक लीडरशिप

AI के बढ़ते इस्तेमाल ने तकनीकी नेतृत्व की भूमिका भी बदल दी है। अब केवल तकनीकी जानकारी काफी नहीं है। नेताओं को कारोबार, जोखिम, नियमों और तकनीक को एक साथ समझना होगा। Rishi Mehta ने लगातार बेहतर तरीके से काम करने और संगठन की जरूरत समझने को अहम बताया। Hemanth Kumar ने टेक लीडर की तुलना क्रिकेट के ऑलराउंडर से की, जिसे कई क्षेत्रों की जानकारी होनी चाहिए।

Greesh Verma Jairath ने कहा कि बोर्ड स्तर पर साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन निवेश को कारोबार के नतीजों और जोखिम से जोड़ना जरूरी है। अभी सबसे बड़ा संदेश यही है कि मजबूत साइबर सुरक्षा AI की रफ्तार को रोकने वाली दीवार नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने का आधार बन सकती है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में AI, क्लाउड और ऑटोमेशन बढ़ने के साथ साइबर रेजिलिएंस भी उतनी ही जरूरी होती जाएगी।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

Don't Miss