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AI डेटा सेंटर की पावर और ऊर्जा खपत इतनी अधिक क्यों है?

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August 20, 2026

AI Trends 2026: क्या AI की बढ़ती ताकत अब बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ा रही है? ताजा आंकड़े बताते हैं कि AI डेटा सेंटर पारंपरिक डेटा सेंटर से कहीं ज्यादा ऊर्जा लेते हैं। अमेरिका में डेटा सेंटरों की बिजली खपत 2023 के 4.4% से बढ़कर 2028 तक 6.7% से 12% तक पहुंच सकती है। Microsoft, Google, Amazon और Meta जैसी कंपनियां इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए अरबों डॉलर लगा रही हैं।

AI डेटा सेंटर पारंपरिक सेंटरों से ज्यादा बिजली लेते हैं, जानिए अमेरिका में 2023 से 2028 तक बिजली की मांग कितनी बढ़ने का अनुमान है।

AI डेटा सेंटर क्या हैं और इनकी जरूरत क्यों बढ़ी?

डेटा सेंटर ऐसी जगह होती है, जहां डिजिटल सेवाओं को चलाने वाले सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्क उपकरण रखे जाते हैं। इन्हीं के जरिए वेबसाइट, ऐप, क्लाउड सेवाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म चलते हैं। पारंपरिक डेटा सेंटर कई तरह के काम संभालते हैं। इनमें वेबसाइट होस्टिंग, डेटाबेस, सामान्य क्लाउड सेवाएं और पुराने तरह के AI सिस्टम भी शामिल हैं। ऐसे AI सिस्टम किसी खास काम के लिए बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, Netflix का सुझाव सिस्टम या Siri और Alexa जैसे वर्चुअल असिस्टेंट, लेकिन जनरेटिव AI का काम ज्यादा भारी है।

यह टेक्स्ट, तस्वीर और वीडियो जैसी नई सामग्री बना सकता है। इसके लिए विशाल डेटा पर मॉडल को प्रशिक्षित करना पड़ता है। इसके बाद भी वास्तविक समय में यूजर की क्वेरी का जवाब देने के लिए लगातार कंप्यूटिंग ताकत चाहिए। यही वजह है कि AI डेटा सेंटर में ज्यादा शक्तिशाली चिप, तेज नेटवर्क और ज्यादा स्टोरेज की जरूरत पड़ती है।

AI डेटा सेंटर इतनी बिजली क्यों खपत करते हैं?

AI डेटा सेंटर की सबसे बड़ी चुनौती बिजली है। जनरेटिव AI के काम में कार्य-विशिष्ट AI की तुलना में 10 से 30 गुना ज्यादा ऊर्जा लग सकती है। एक आसान उदाहरण भी सामने आया है। अनुमान के मुताबिक जनरेटिव AI से एक तस्वीर बनाने में उतनी ऊर्जा लग सकती है, जितनी एक स्मार्टफोन को पूरी तरह चार्ज करने में लगती है। Electric Power Research Institute के अनुमान के अनुसार, एक सामान्य Google Search में करीब 0.3 वाट-घंटे (Wh) ऊर्जा लगती है। वहीं ChatGPT की एक क्वेरी के लिए करीब 2.9 Wh ऊर्जा की जरूरत हो सकती है। AI सिस्टम सिर्फ कंप्यूटिंग के दौरान ही बिजली नहीं लेते। सर्वर लगातार गर्म भी होते हैं। इसलिए उन्हें ठंडा रखने के लिए बड़े और ज्यादा प्रभावी कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है।

तरल कूलिंग से लेकर ज्यादा शक्तिशाली हार्डवेयर तक

पारंपरिक डेटा सेंटर में अक्सर हवा और पंखों से सर्वर ठंडे किए जाते हैं। AI डेटा सेंटर में यह तरीका हर स्थिति में पर्याप्त नहीं होता। AI चिप ज्यादा गर्मी पैदा करती हैं। इसलिए कई आधुनिक केंद्रों में तरल आधारित कूलिंग का इस्तेमाल किया जाता है। पानी की गर्मी सोखने की क्षमता हवा से करीब 3 गुना ज्यादा होती है। तरल कूलिंग के अलग-अलग तरीके हैं। कुछ सिस्टम गर्म हवा को ठंडा करने के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं। कुछ में सर्वर के अंदर सीधे कूलेंट पहुंचाया जाता है, ताकि प्रोसेसर की गर्मी तेजी से बाहर निकाली जा सके। AI डेटा सेंटर को तेज आंतरिक नेटवर्क और बड़े स्टोरेज सिस्टम भी चाहिए। प्रशिक्षण और AI मॉडल को चलाने के लिए हजारों शक्तिशाली प्रोसेसर एक साथ काम कर सकते हैं।

अमेरिका में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान

अमेरिका में AI डेटा सेंटर का विस्तार पहले ही तेज हो चुका है। ऊर्जा विभाग के अनुसार, 2023 में अमेरिकी डेटा सेंटरों ने कुल बिजली का करीब 4.4% इस्तेमाल किया। यह हिस्सेदारी 2028 तक 6.7% से 12% के बीच पहुंच सकती है। इसी दौरान डेटा सेंटरों की कुल बिजली खपत 176 TWh से बढ़कर 325 से 580 TWh तक पहुंचने का अनुमान है। ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, 2020 से 2026 के बीच अमेरिका की बिजली खपत में औसतन 1.7% सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है। डेटा सेंटर इस बढ़ती मांग के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। Goldman Sachs का अनुमान इससे भी बड़ी तस्वीर दिखाता है। उसके मुताबिक डेटा सेंटरों से वैश्विक बिजली मांग 2027 तक 2023 के मुकाबले 50% और 2030 तक 165% बढ़ सकती है।

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Microsoft, Google और Meta ने लगाए अरबों डॉलर

AI की दौड़ में बड़ी तकनीकी कंपनियां डेटा सेंटर पर भारी खर्च कर रही हैं। अमेरिका के पास 2025 की शुरुआत में दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय डेटा सेंटर थे। इनकी संख्या 5,400 से ज्यादा थी। 2024 में प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर कुल 200 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किया। Microsoft, Amazon, Alphabet और Meta का संयुक्त AI इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च 2025 में 300 अरब डॉलर से ज्यादा रहने का अनुमान था।

कंपनियों की बड़ी घोषणाएं भी सामने आई हैं:

  • Microsoft ने 2025 में 80 अरब डॉलर डेटा सेंटर सुविधाओं पर लगाने की घोषणा की।
  • Alphabet ने वैश्विक डेटा सेंटर नेटवर्क के विस्तार के लिए 75 अरब डॉलर निवेश की योजना बताई।
  • Meta ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर 60 से 65 अरब डॉलर खर्च करने की योजना घोषित की।
  • OpenAI, SoftBank और Oracle ने 500 अरब डॉलर की चार साल की Stargate पहल की घोषणा की।

Stargate परियोजना के तहत अमेरिका में Nvidia की चिप से चलने वाले उन्नत AI डेटा सेंटरों का नेटवर्क बनाने की योजना है।

AI डेटा सेंटर का हिस्सा 2030 तक 70% हो सकता है

आज ज्यादातर डेटा सेंटर हाइब्रिड हैं। यानी एक ही जगह पारंपरिक कंप्यूटिंग और AI दोनों तरह के काम होते हैं, लेकिन तस्वीर तेजी से बदल रही है। अनुमान के मुताबिक 2025 के अंत तक दुनिया की डेटा सेंटर क्षमता का करीब 33% AI अनुप्रयोगों के लिए समर्पित हो सकता है। यह हिस्सा 2030 तक 70% तक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले वर्षों में बिजली, चिप और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग और बढ़ेगी। AI का इस्तेमाल अब सिर्फ तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है। डिजिटल एजेंट, कंटेंट बनाने वाले टूल और दूसरे AI सिस्टम कारोबार और रोजमर्रा के काम में तेजी से शामिल हो रहे हैं। जितने ज्यादा उद्योग AI अपनाएंगे, उतनी ही ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए होगी। इसके साथ बिजली ग्रिड पर दबाव भी बढ़ सकता है।

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आगे सबसे बड़ी चुनौती बिजली की आपूर्ति

AI की रफ्तार बनाए रखने के लिए सिर्फ बेहतर चिप और बड़े डेटा सेंटर काफी नहीं होंगे। इनके लिए लगातार और भरोसेमंद बिजली की भी जरूरत होगी। अमेरिका के सामने अब यही बड़ा सवाल है कि AI डेटा सेंटर की तेजी से बढ़ती मांग को बिजली बाजार कैसे पूरा करेगा। अगर AI का इस्तेमाल अनुमान के मुताबिक बढ़ता है, तो ऊर्जा उत्पादन, ग्रिड और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े निवेश की जरूरत पड़ेगी।

Ragini Sinha

Ragini Sinha Analytics Insight में कंटेंट एनालिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। यहां वह स्मार्ट टेक्नोलॉजी, गेमिंग, OTT, क्रिप्टोकरेंसी, ट्रेंडिंग न्यूज और स्टॉक मार्केट जैसे विषयों पर काम करती हैं और जटिल जानकारी को सरल व प्रभावशाली कंटेंट में बदलने के लिए जानी जाती हैं।
मीडिया इंडस्ट्री में 7 सालों के अनुभव के साथ उन्होंने कंटेंट राइटर से लेकर सीनियर कंटेंट राइटर और प्रोग्राम प्रोड्यूसर तक का सफर तय किया है। उन्होंने बिहार चुनाव और दिल्ली चुनाव जैसे बड़े इवेंट्स को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण में मजबूत पकड़ बनाई है, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है।

रागिनी ने Zee News, NewsTrack, ETV Bharat और Way2News जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है। उन्होंने Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication से बैचलर डिग्री और Bharatiya Vidya Bhavan से Public Relation में अध्ययन किया है।

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