Internet Shutdown: क्या किसी प्रदर्शन के दौरान सरकार इंटरनेट बंद कर सकती है? 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद होने की रिपोर्ट सामने आई। कई जगहों पर सिग्नल जैमर लगाए जाने की भी बात कही गई। इससे प्रदर्शनकारियों को वीडियो अपलोड करने और लाइव स्ट्रीमिंग में परेशानी हुई। अब सवाल है कि भारत में Internet Shutdown को लेकर कानून क्या कहता है और सरकार किन परिस्थितियों में इंटरनेट सेवा रोक सकती है?
Internet Shutdown को लेकर भारत में क्या नियम हैं? जानिए सरकार कब इंटरनेट बंद कर सकती है और Telecommunications Act 2023 क्या कहता है।
Internet Shutdown क्या होता है?
जब किसी खास इलाके या लोगों के लिए इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन सेवाओं को जानबूझकर बंद किया जाता है, तो इसे Internet Shutdown कहा जाता है। इसका मतलब सिर्फ इंटरनेट पूरी तरह बंद करना नहीं है। इंटरनेट की स्पीड कम करना या किसी खास ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना भी इसके दायरे में आ सकता है। ऐसे कदम का सीधा असर आम लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों पर पड़ता है। इसमें सोशल मीडिया, वीडियो अपलोडिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार कब कर सकती है Internet Shutdown?
Telecommunications Act, 2023 के सेक्शन 20(2)(b) के तहत जन सुरक्षा या पब्लिक इमरजेंसी की स्थिति में टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं को अस्थायी तौर पर बंद किया जा सकता है। हालांकि, केवल किसी प्रदर्शन को आधार बनाकर इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता। इसके पीछे जन सुरक्षा या पब्लिक इमरजेंसी जैसा खास उद्देश्य होना चाहिए। आदेश में इलाके, समय और इंटरनेट बंद करने की वजह साफ लिखना जरूरी है।
राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा आदेश केंद्रीय गृह सचिव जारी कर सकते हैं। राज्य स्तर पर यह अधिकार राज्य के गृह सचिव के पास होता है। इमरजेंसी में संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी भी आदेश दे सकता है। हालांकि, ऐसे आदेश को 24 घंटे के भीतर संबंधित सक्षम अधिकारी से मंजूरी दिलाना जरूरी है।
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Internet Shutdown के लिए कौन सा कानून लागू है?
भारत में पहले इंटरनेट बंद करने के लिए Indian Telegraph Act, 1885 के सेक्शन 5(2) और Temporary Suspension of Telecom Services Rules, 2017 का इस्तेमाल होता था। अब इनकी जगह Telecommunications Act, 2023 और Telecommunications (Temporary Suspension of Services) Rules, 2024 लागू हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, नए प्रावधान लागू होने के बाद भी 2024 के बाद कुछ राज्यों में पुराने नियमों का हवाला देकर इंटरनेट बंद करने के आदेश जारी किए गए। अगर किसी व्यक्ति या संगठन को लगता है कि इंटरनेट बंद करने का आदेश कानूनी नियमों के खिलाफ है, तो उसे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
भारत में Internet Shutdown का रिकॉर्ड कैसा है?
इंटरनेट शटडाउन के मामले में भारत का रिकॉर्ड लंबे समय से चर्चा में रहा है। Access Now की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 65 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में कम बताया गया है। इसके बावजूद, इंटरनेट बंद करने का मुद्दा लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।
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Internet Shutdown सरकार के पास मौजूद एक गंभीर कदम है। कानून इसके इस्तेमाल के लिए तय परिस्थितियां और प्रक्रिया निर्धारित करता है। इसलिए इंटरनेट बंद करने के हर आदेश में स्पष्ट कारण, सीमित क्षेत्र और तय समय का ध्यान रखना जरूरी है।
