Pakistan deploys troops jets Saudi: पिछले कुछ महीने से पाकिस्तान की छवि मिडिल ईस्ट में तनाव को कम करने में मिडिलमैन की भूमिका में दिखाई दे रही थी। लेकिन अब पाकिस्तान ने एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका तो वहीं, सउदी अरब में अपनी सैन्य ताकत को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है। रिपोर्ट की माने तो पाकिस्तान के हजारों सैनिक, लड़ाकू विमान, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम को इसमें शामिल किया गया है। जो इस बात को दर्शाने के लिए काफी है कि इस क्षेत्र में तनाव कम होने के बावजूद पाकिस्तान और सऊदी अरब सुरक्षा मोर्चे पर पूरी तैयारी में हैं।
पाकिस्तान की सऊदी अरब में बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पढ़ें पूरी खबर।
सऊदी अरब में भेजे गए हजारों सैनिक और फाइटर जेट
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 8,000 सैनिकों भेजा है। 16 लड़ाकू विमान, चीन के सहयोग से बने JF-17 फाइटर जेट प्रमुख हैं। इसे अप्रैल में ही तैनात कर दिया गया था। इसके अलावे, ड्रोन स्क्वाड्रन और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए गए हैं।
मध्यस्थता के साथ सैन्य तैयारी भी जारी
पाकिस्तान की ओऱ से यह कदम से तब उठाया गया है जब खुद ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान ने युद्ध विराम कराने में महत्वपूर्ण रोल निभाई थी। दोनों देशों के बीच बात के लिए एक प्लेटफॉर्म भी अपने सरजमीन पर दिया था। हालांकि अब पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य सक्रियता यह संकेत दे रही है कि वह कूटनीति और रणनीतिक सुरक्षा दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है।
रक्षा समझौते ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी
रिपोर्ट की मानें तो सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा में सहयोग का वादा किया है। समझौते की शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्री Khawaja Asif पहले संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को पाकिस्तान की न्यूक्लियर सुरक्षा भी मिल सकती है। इससे तय है कि पाकिस्तान को सउदी के साथ सुरक्षा को लेकर समझौते हुए हैं।
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सलाहकार भूमिका से आगे बढ़ती दिख रही तैनाती
वहीं, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा भेजे गए सैनिक और एयरफोर्स कर्मी फिलहाल सलाहकार और प्रशिक्षण की भूमिका निभाएंगे। वहीं रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में फाइटर जेट, एयर डिफेंस सिस्टम और सैनिक भेजना केवल प्रतीकात्मक समर्थन नहीं माना जा सकता। यह सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था में पाकिस्तान की सीधी भागीदारी को दर्शाता है।
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80 हजार सैनिकों तक तैनाती की संभावना
इसके अलावे रिपोर्ट में जिस बात के दावे किए जा रहे हैं उसमें दोनों देशों के बीच करीब 80000 तक पाकिस्तानी सैनिक की तैनाती की बात पर समझौता की गई है। साथ ही, युद्पोतों की तैनाती की बात कही जा रही है। लेकिन इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान और सऊदी अरब की यह बढ़ती सैन्य साझेदारी क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। खासकर तब, जब पाकिस्तान एक ओर ईरान से संबंध बनाए रखना चाहता है।
