Thermal plant Cyberattack: यूरोप में ऊर्जा ढ़ांचे की सुरक्षा को लेकर नई चिंता सामने आई है। स्वीडन के एक थर्मल पावर प्लांट पर साइबर हमले की कोशिश ने खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा अधिकारियों की माने तो इस साइबर हमले के पीछे रूस से जुड़े हैकर्स का हाथ हो सकता है।
रूसी हैकरों से जुड़े साइबर अटैक ने दिखाया कि अब ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर सीधे निशाने पर है। जानिए पूरा मामला।
साइबर अपराधियो ने बदला हमले का तरीका
Cyber attack का नाम सुनते ही दिमाग में वेबसाइट या सर्वर का नाम घूमने लगता है। पहले जहां DDos जैसे आम थे। वही, अब हैकर्स सीधे पावर प्लांट के ऑपरेशन टेक्नोलॉजी सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। जानकार तो इसे बेहद खतरनाक मान रहे हैं। इससे अचानक बिजली आपूर्ति जैसे जरूरी सेवाएं सीधे प्रभावित हो सकती है।
स्वीडन के मंत्री Carl Oskar Bohlin ने बताया कि प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत था। लेकिन अब सीधे ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी में नुकसान पहुंचाने की कोशिशे की जा रही है। इससे यूरोपीय ऊर्जा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई है।
नियोजित रुकावट को नाकाम करना
सरकारी अधिकारियों ने औपचारिक रूप से रूस समर्थक Hacktivist Groups पर आरोप लगाया है। अच्छी बात यह रही कि जिस सुविधा को निशाना बनाया गया था उसके अंदरूनी सुरक्षा तंत्र और मज़बूत नेटवर्क विभाजन ने इस अनाधिकृत पहुँच को सफलतापूर्वक पहचान लिया और समय रहते उसे ब्लॉक कर दिया। जिससे संभावित बड़ी घटना टल गई। यह बुनियादी ढांचा को नुकसान पहुंचाने की ओर कदम बढ़ा रही है।
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आम जिंदगी और अर्थवयवस्था दोनों प्रभावित
यह मामला अकेला नहीं है। नॉर्वे और डेनमार्क से भी ऐसे हमले सामने आए हैं। जिससे पूरे यूरोप में इंफ्रस्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ रहा है। साइबर हमलों को अब हाइब्रिड वॉरफेयर का हिस्सा मा जा रहा है। इसमें डिजिटल और रणनीतिक दोनों तरीके शामिल है। इससे किसी भी देश की आम जिंदगी और अर्थवयवस्था दोनों प्रभावित हो सकती है। यूके के NCSC ने एक मार्गदर्शिका भी प्रकाशित की थी।
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NCSC जारी कर चुका है मार्गदर्शिका
NCSC ने संगठनों के लिए एक मार्गदर्शिका प्रकाशित की थी, जिसमें OT सिस्टम से और उनके भीतर कनेक्टिविटी को डिज़ाइन करने, उसकी समीक्षा करने और उसे सुरक्षित बनाने के तरीके बताए गए थे। हाल की महीने की घटना की जिक्र करें तो पौलैंड में साइबर हमलों में तेजी आई है। सीवेज प्लांट और स्पेस एजेंसी तक को निशाना बनाया गया है। नॉर्वे ने एक बांध में तोड़फोड़ का आरोप रूसी हैकरों पर लगाया।
यह घटना चेतावनी देती है कि अब ऊर्जा प्रणाली भी साइबर हमलों का बड़ा लक्ष्य बन चुका है। इसलिए जरूरी है कि देश और कंपनियां अपनी साइबर सुरक्षा को और मजबूत करें।
